comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

Farmers Protest: सरकार और किसानों के बीच 10वीं दौर की वार्ता आज, ट्रैक्टर रैली पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी

January 20th, 2021 11:55 IST

हाईलाइट

  • सरकार के साथ किसानों की 10वें दौर की बातचीत
  • 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली पर SC में सुनवाई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों की बुधवार को सरकार के साथ 10वें दौर की बातचीत होगी। ये बैठक पहले 19 जनवरी को होनी थी, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। वहीं सुप्रीम कोर्ट किसानों की 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के मामले पर भी आज सुनवाई करेगा।

बता दें कि पिछले 50 से ज्यादा दिनों से दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान और सरकार के बीच अब तक नौ दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकल पाया। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वो वापस नहीं जाएंगे। वहीं कृषि ने कहा था  कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, कानूनों को लागू नहीं किया जा सकता है। अब हम उम्मीद करते हैं कि किसान अगली बैठक मेंकानून पर क्लॉज वाइज चर्चा करेंगे और सरकार को बताएंगे कि वे कानूनों को निरस्त करने के अलावा क्या चाहते हैं?

उधर, किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी को दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड करने का ऐलान किया है। स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने रविवार को कहा था कि गणतंत्र दिवस के दिन किसान दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। इस दौरान सभी ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगा होगा। साथ ही वो आउटर रिंग रोड पर मार्च करेंगे। इसके लिए हजारों ट्रैक्टरों को तैयार किया जा रहा है। योगेंद्र यादव ने साफ किया कि ये रैली राजपथ से बहुत दूर होगी, ऐसे में आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह में कोई व्यवधान नहीं पैदा होगा।

दिल्ली पुलिस ने इस ट्रैक्टर रैली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा कार्यक्रम है। आंदोलन के नाम पर देश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी की इजाज़त नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस ने इस रैली पर रोक लगाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि यह पुलिस के ऊपर है कि वह इसकी अनुमति देती है या नहीं।

कमेंट करें
P971U
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।