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भारतीय सेना में बतौर क्लर्क जानकारी जुटे रहे 2 पाकिस्तानी जासूस निष्कासित

June 01st, 2020 20:30 IST
 भारतीय सेना में बतौर क्लर्क जानकारी जुटे रहे 2 पाकिस्तानी जासूस निष्कासित

हाईलाइट

  • भारतीय सेना में बतौर क्लर्क जानकारी जुटे रहे 2 पाकिस्तानी जासूस निष्कासित

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। जासूसी की गतिविधियों में लिप्त पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारियों आबिद हुसैन आबिद और मोहम्मद ताहिर की हिरासत के बाद अब उन्हें अवांछित घोषित करते हुए भारत से निष्कासित घोषित कर दिया गया है।

पाकिस्तानी उच्चायोग के दो अधिकारी रविवार को जासूसी करते पकड़े गए थे। मिल्रिटी इंटेलिजेंस (एमआई) के एक ऑपरेशन में पाया गया कि ये लोग भारतीय सेना के क्लर्क के रूप में भारतीय रक्षाकर्मी से सीमा पर सैन्य टुकड़ी की तैनाती के बारे में जानकारी इकट्ठा करना चाहते थे।

शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, आबिद और ताहिर दोनों ने रविवार दोपहर दिल्ली के करोलबाग इलाके में एक डिकॉय से मुलाकात के दौरान भारतीय सेना के साथ काम करने वाले क्लर्क के रूप में अपनी पहचान बताई।

सूत्र ने कहा, उन्होंने कहा कि वे भारतीय सेना में क्लर्क के रूप में तैनात हैं और कुछ समय उन्होंने अन्य सरकारी कार्यालयों में काम करने के बारे में बताया। उन्होंने भारतीय बलों की तैनाती के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश की।

एमआई ने रविवार को तीन लोगों को हिरासत में लिया, जिनकी पहचान पाकिस्तानी मिशन में सहायक आबिद (42), क्लर्क ताहिर (44) और एक ड्राइवर जावेद हुसैन (36) के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ महीनों से निगरानी में थे।

खुफिया (इंटेलिजेंस) अधिकारियों के अनुसार, उन्हें एक डिकॉय से भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान की जानकारी प्राप्त करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।

सूत्र ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान वापस भेजा जा रहा है और वे सोमवार शाम को पंजाब की अटारी सीमा पार करेंगे।

विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान में रविवार रात कहा गया कि नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग के दो अधिकारियों को जासूसी गतिविधियों में लिप्त होने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

पाकिस्तान ने हालांकि हमेशा की तरह भारत को आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

करोलबाग क्षेत्र में एक डिकॉय के साथ बैठक के दौरान आबिद की कॉल और ऑडियो रिकॉर्डिग आईएएनएस के पास भी है।

आबिद द्वारा डिकॉय को की गई फोन कॉल में कथित पाकिस्तानी जासूस को यह कहते हुए सुना जा सकता है, मैंने एक दोस्त से यह सोचकर आपका नंबर लिया है कि वो मेरा दोस्त है।

आबिद ने आगे डिकॉय को बताया कि एक ही नाम वाला एक और दोस्त है और यही वजह रही कि उसने भारतीय सेना में अपने एक दोस्त से उसका नंबर मांगा।

आबिद ने डिकॉय को यह भी सूचित किया कि उसने अपने परिवार को नोएडा में रखा है और वह यूनिट में रहने के बजाय वहीं उनके साथ रहता है।

ऑडियो में, आबिद को डिकॉय से पूछते हुए भी सुना जा सकता है कि क्या वह व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें व्हाट्सएप का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

इस पर आबिद ने डिकॉय से कहा, ऐसा कोई नियम नहीं है और हम तो इसका (व्हाट्सएप) उपयोग करते हैं, हो सकता है आप नए हों, इसलिए।

आबिद ने डिकॉय से उसका मोबाइल नंबर सेव करने के लिए भी कहा।

डिकॉय के साथ जासूस की बैठक के दौरान दर्ज किए गए 22 मिनट के ऑडियो क्लिप में दोनों जासूसों को डिकॉय से पूछते हुए सुना जा सकता है कि क्या वह किसी रेस्तरां में कुछ खाना पसंद करेंगे।

मिल्रिटी इंटेलिजेंस के डिकॉय ने कहा कि अब वे (सैनिक) जो छुट्टी पर चले गए हैं, वे नहीं आएंगे। आबिद तब डिकॉय को बात के लिए कैंटीन में उनके साथ बैठने के लिए कहता है।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, दोनों में से हुसैन (42), पाकिस्तान उच्चायोग में व्यापार विभाग में सहायक के रूप में काम कर रहा था, जो पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई की संचालक है और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से है।

जासूसी गतिविधियों में लिप्त रहते हुए उसने भारतीय रक्षा कर्मियों से कहा कि वह अमृतसर से है।

एक सूत्र ने कहा कि दोनों अधिकारी उनकी संदिग्ध गतिविधियों के लिए भारतीय एजेंसियों के रडार पर थे।

सूत्र ने आगे कहा कि जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए एमआई का ऑपरेशन पिछले पांच से छह महीने से चल रहा था।

उन्होंने कहा, लेकिन लॉकडाउन ने ऑपरेशन में देरी हुई, क्योंकि उनकी यूनिट से सैनिकों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध था।

सूत्र ने आगे कहा कि आईएसआई की गुप्त योजनाओं के अनुसार, उन्होंने 2013 से पाकिस्तान उच्चायोग के साथ काम करना शुरू कर दिया, जबकि एक ने चालक के रूप में काम शुरू किया। सूत्र ने कहा कि उन्हें जासूसी के लिए हर महीने मोटी रकम भी दी जाती थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।