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उत्तर प्रदेश: शाह बोले- यदि CAA नागरिकता छीनता है तो विपक्ष साबित करके दिखाए


हाईलाइट

  • अमित शाह ने CAA के समर्थन में रैली की
  • विपक्ष दलों पर जमकर निशाना साधा

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। संसद से नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पारित होने के बाद से देशभर में कोहराम मचा हुआ है। इस बिल को एक्ट बनाने के बाद इसके खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर भाजपा के कई दिग्गज नेता, लोगों को जागरूक करने के लिए देशभर में जनसभाएं कर रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जनसभा कर रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष दलों को चुनौती देते हुए कहा कि 'यदि CAA किसी भी व्यक्ति की नागरिकता छीन सकता है, तो उसे साबित करके दिखाओ।'

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गृह मंत्री शाह
ने कहा, 'कांग्रेस जब तक सत्ता में थी, तब तक अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर नहीं बनने दिया। कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े होकर केस में अड़ंगा लगाते थे। मोदी सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केस तेजी से चला और अब अयोध्या में आसमान छूने वाला श्रीराम का मंदिर बनने वाला है।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, '2 साल पहले JNU के अंदर देश विरोधी नारे लगे। मैं जनता से पूछने आया हूं कि जो भारत माता के एक हजार टुकड़े करने की बात करे, उसे जेल में डालना चाहिए या नहीं? पीएम मोदी ने उनको जेल में डाला और ये राहुल एंड कंपनी कह रही है कि ये वाणी स्वतंत्रता का अधिकार है।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'राजस्थान के पिछले विधानसभा में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा कि पाकिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों को नागरिकता दी जाएगी। आप करो तो सही है और मोदी जी करें, तो विरोध करते हो। अखिलेश बाबू एंड कंपनी सुन लो, हमें जितनी गालियां देनी हैं दो, हमारी पार्टी को जितनी गालियां देनी हैं दो मगर भारत माता के खिलाफ देश में नारे जो लगाएगा उसे जेल में डाला जाएगा।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'महात्मा गांधी जी ने 1947 में कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख भारत आ सकते हैं। उन्हें नागरिकता देना, गौरव देना, भारत सरकार का कर्तव्य होना चाहिए। नेहरू जी ने कहा था कि केंद्रीय राहत कोष का उपयोग शरणार्थियों को राहत देने के लिए करना चाहिए। इनको नागरिकता देने के लिए जो जरूरी हो वो करना चाहिए, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'कांग्रेस के पाप के कारण धर्म के आधार पर भारत के दो टुकड़े हुए। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या कम होती रही। आखिर कहां गए ये लोग? कुछ लोग मार दिए गए, कुछ का जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। तब से शरणार्थियों के आने का सिलसिला चल रहा है। नरेन्द्र मोदी जी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को उनके जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'पीएम मोदी ने वर्षों से प्रताड़ित लोगों को उनके जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है। मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूं कि जिसको विरोध करना है करे, लेकिन CAA वापस नहीं होने वाला है। मैं वोट बैंक के लोभी नेताओं को कहना चाहता हूं कि आप इनके कैंप में जाइए, कल तक जो 100-100 हेक्टेयर के मालिक थे वे आज एक छोटी सी झोपड़ी में परिवार के साथ भीख मांगकर गुजारा कर रहे।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'इस बिल में किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुए, उनके धार्मिक स्थल तोड़े जाते हैं। वो लोग वहां से भारत आए हैं। ये बिल ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता देने का है। जब देश आजाद हुआ, कांग्रेस के पाप के कारण धर्म के आधार पर भारत मां के दो टुकड़े हो गए। 16 जुलाई 1947 को कांग्रेस पार्टी ने प्रस्ताव करके धर्म के आधार पर विभाजन को स्वीकार किया।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'मैंने CAB को लोकसभा में पेश किया। मैं विपक्षियों से कहना चाहता हूं कि आप इस बिल पर सार्वजनिक रूप से चर्चा कर लो। ये अगर किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकता है, तो उसे साबित करके दिखाओ।' शाह ने कहा, 'देश में CAA के खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं। CAA में कहीं पर भी किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है, इसमें सिर्फ नागरिकता देने का प्रावधान है।'

गृह मंत्री शाह ने कहा, 'CAA पर विरोधी पार्टियां दुष्प्रचार और भ्रम फैला रही हैं, इसलिए भाजपा जन जागरण अभियान चला रही है, जो देश को तोड़ने वालों के खिलाफ जन जागृति का अभियान है।' उन्होंने कहा कि 'पीएम मोदी CAA लेकर आए हैं और कांग्रेस, ममता बनर्जी, अखिलेश, मायावती, केजरीवाल सभी इस एक्ट के खिलाफ भ्रम फैला रहे हैं।'

क्या है CAA
CAA वह अधिनियम है, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामिक देशों से भगाए गए गैर मुसलमानों को पनाह देगा। अधिनियम के मुताबिक 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले जिन भी हिंदुओं, सिखों, जैनों, पारसियों, बौद्धों और ईसाईयों ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत की पनाह ली हैं, उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान करने की कोशिश की जाएगी।

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