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सीपीईसी में चीनी कंपनियों को अनुचित लाभ व भ्रष्टाचार से पाकिस्तानियों में नाराजगी

June 22nd, 2020 18:30 IST
 सीपीईसी में चीनी कंपनियों को अनुचित लाभ व भ्रष्टाचार से पाकिस्तानियों में नाराजगी

हाईलाइट

  • सीपीईसी में चीनी कंपनियों को अनुचित लाभ व भ्रष्टाचार से पाकिस्तानियों में नाराजगी

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान द्वारा उन कंपनियों पर कार्रवाई करने की संभावना नहीं है जो ऊर्जा क्षेत्र में उच्च स्तर के भ्रष्टाचार में शामिल हैं। इन कंपनियों में मूल रूप से चीन की कंपनियां शामिल हैं।

पाकिस्तान में कमेटी फॉर पावर सेक्टर ऑडिट, सर्कुलर डेट रिजर्वेशन एंड फ्यूचर रोडमैप ने 278 पन्नों की एक रिपोर्ट में बहुप्रचारित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना (सीपीईसी) के तहत स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में गंभीर उल्लंघनों और विसंगतियों का खुलासा किया गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसका कारण पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में चीन की बढ़ती भागीदारी और प्रभाव है। सूत्रों ने कहा कि चीन के बढ़ते प्रभुत्व पर पाकिस्तान के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी कंपनियों ने सीपीईसी परियोजनाओं से अनुचित लाभ प्राप्त किया है। चीन द्वारा ऋण का एक ही हिस्सा द्विपक्षीय रूप से दिया गया है, कर्ज के अन्य हिस्से चीन विकास बैंक, आईसीबीसी चीन और बैंक ऑफ चाइना के माध्यम से भी दिए गए हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अवैध लाभ और अक्षमताओं की कीमत पाकिस्तान के लोगों को चुकानी होगी। एक विश्लेषक ने कहा, पाकिस्तान के अधिकारी चीन और चीनियों के खौफ में हैं, जबकि देश में आम लोग चीन के बढ़ते प्रभाव से खुश नहीं हैं। असंतोष और गुस्सा है क्योंकि लोगों का मानना है कि जो कुछ हो रहा है उसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, कई चीनी कंपनियों ने प्रचलित बाजार दरों की तुलना में अधिक उच्च शुल्क के माध्यम से अवास्तविक और आउट-ऑफ-टर्न मुनाफा कमाया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दो करीबी सहयोगियों रजाक दाऊद और नदीम बाबर के नाम भी इस परियोजना से लाभ उठाने वालों में सामने आए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीईसी के तहत बहुप्रचारित ट्रांसमिशन लाइन परियोजना, भारत की एक ऐसी ही परियोजना की तुलना में 200 प्रतिशत महंगी है।

यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज ने एक लेख में कहा है, समिति ने कोयले से चलने वाली और पवन ऊर्जा से जुड़ी कई चीनी बिजली परियोजनाओं पर उंगली उठाई है, लेकिन दो चीनी कोयला बिजली उत्पादकों, हुआनेंग शेडोंग रुई (एचएसआर) और पोर्ट कासिम इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड (पीक्यूईपीसीएल) को मानक प्रक्रियाओं के उल्लंघन और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण विशेष रूप से कठघरे में खड़ा किया है। इन दोनों चीनी कंपनियों ने अतिरिक्त लाभ पाने के लिए अतिरिक्त सेट-अप लागत दिखाई। इनका वार्षिक लाभ 50 से 70 प्रतिशत तक रहा।

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जांच रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कैसे चीनी कंपनियां पाकिस्तान में महत्वपूर्ण लोगों को रिश्वत देने में शामिल रही हैं, जिसमें पाकिस्तानी सेना के लोग भी शामिल हैं।

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