दैनिक भास्कर हिंदी: राफेल डील पर अनिल अंबानी का राहुल गांधी को पत्र, जताई नाराजगी

July 26th, 2018

हाईलाइट

  • राफेल डील पर राहुल गांधी को अनिल अंबानी ने लिखा था पत्र।
  • 2 पेज के पत्र में बताई सच्चाई।
  • पत्र में लिखा फ्रेंच ग्रुप डसॉल्ट ने उन्हें स्थानीय साझेदार के रूप में चुना, इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-फ्रांस के बीच हुई राफेल डील में बार-बार रिलायंस समूह को भागीदार बता रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अनिल अंबानी ने एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने राहुल के सारे आरोपों को नकारा था। दो पेज का ये पत्र अनिल अंबानी ने 13 दिसंबर 2017 को लिखा था। जिसकी कॉपी पार्टी के सभी प्रवक्ताओं को भेजी थी। अनिल अंबानी ने अपने पत्र में लिखा था कि फ्रेंच ग्रुप डसॉल्ट ने उन्हें स्थानीय साझेदार के रूप में चुना, इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। अनिल ने राहुल को बताया कि उनकी कंपनी के पास जरूरी अनुभव है और वह रक्षा उत्पादन के कई क्षेत्रों में आगे है। इस पत्र को लेकर अनिल अम्बानी ने आज एक बयान जारी किया है।

 

 

राहुल लगातार रिलायंस समूह के इस डील में भागीदार बनने को लेकर सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि अनिल ने गांधी परिवार से अपने परिवार के सम्मानजनक रिश्तों की बात कही थी। उन्होंने इस बात पर दुख जाहिर किया था कि कांग्रेस के कुछ नेता उनके और उनके ग्रुप के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण बयान दे रहे हैं। अनिल ने पत्र में लिखा है कि, गुजरात चुनाव में राफेल सौदे को लेकर काफी हल्ला हो रहा था कि "रिलायंस डिफेंस के पास गुजरात के पीपावाव में प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा शिपयार्ड है। हम मौजूदा समय में भारतीय नौसेना के लिए 5 ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल और भारतीय तटरक्षकों के लिए 14 फास्ट पेट्रोलिंग वेसल बना रहे हैं। फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदे जा रहे हैं, जो डसॉल्ट की उत्पादन यूनिट से तैयार स्थिति में भारत भेजे जाएंगे। भारतीय वायु सेना या किसी भी भारतीय कंपनी का इसमें कोई रोल नहीं है। 

 


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अबांनी ने पत्र में साफ किया है कि यह दो निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच स्वतंत्र समझौता है और इसमें सरकारों की कोई भूमिका नहीं है। अंबानी ने पत्र में कहा कि उनके समूह का डसॉल्ट के साथ संयुक्त उद्यम वैमानिकी और रक्षा क्षेत्र के लिए कलपुर्जे तथा प्रणाली बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि डसॉल्ट एविएशन के साथ संयुक्त उद्यम से भारत में हजारों नौकरियों उपलब्ध कराने के साथ रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के इंजीनियरों को प्रशिक्षण और कौशल उपलब्ध कराया जा सकेगा।