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India-China Dispute: क्या चीन ने पैंगोंग लेक के फिंगर 4 तक कर लिया कब्जा? दोनों देशों की सेनाएं डटी

India-China Dispute: क्या चीन ने पैंगोंग लेक के फिंगर 4 तक कर लिया कब्जा? दोनों देशों की सेनाएं डटी

हाईलाइट

  • पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में ग्राउंड पर स्थिति क्या है?
  • चीनी सैनिकों का पैंगोंग सो के करीब 8 किलोमीटर लंबे इलाके पर कब्जा
  • फिंगर 4 से फिंगर 8 के बीच के इलाके को भारत अपना मानता है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में ग्राउंड पर स्थिति क्या है ये अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं है। लेकिन इस बात में बहुत ही कम संदेह है कि चीनी सैनिकों ने पैंगोंग सो के करीब 8 किलोमीटर लंबे इलाके में अस्थाई निर्माण कर लिया है। 8 किलोमीटर लंबा ये इलाका फिंगर 4 से फिंगर 8 के बीच का है जिसे भारत अपना मानता है। चीनी सैनिक मई से इस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इस इलाके में दोनों देशों की सेनाएं डटी हुई है।

भारत की बॉर्डर पोस्ट फिंगर 3 और 4 के बीच
पैंगोंग लेक का पश्चिमी हिस्सा भारत में और पूर्वी छोर चीन में आता है। इस लेक की लंबाई 135 किलोमीटर है। इसमें से 45 किलोमीटर का हिस्सा भारत के पास है जबकि 90 किलोमीटर का हिस्सा चीन के पास। इस लेक के उत्तर में जो पहाड़ है उसे आठ फिंगरों में मार्क किया गया है। फिंगर यानी पहाड़ का बाहर निकला हुआ हिस्सा। इंडियन आर्मी के मैप के अनुसार LAC फिंगर 8 से गुजरती है जबकि चीन कहता है कि LAC फिंगर 2 से गुजरती है। भारत की बॉर्डर पोस्ट फिंगर 3 और फिंगर 4 के बीच है और वह फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता है। जबकि चीन की बॉर्डर पोस्ट फिंगर 8 पर है।

सोर्स- टाइम्स ऑफ  इंडिया

भारत को फिंगर  4 पर पेट्रोलिंग से रोका
5 और 6 मई 2020 को भारत और चीन के सैनिकों की धक्का-मुक्की की खबरें आई थी। इस धक्का-मुक्की की वजह थी चीन की सेना जो भारतीय सैनिकों को फिंगर 4 में पेट्रोलिंग से रोक रही थी। चीन ने आधिकारिक रूप से बयान दिया कि भारत चीन के इलाके में घुसपैठ कर रहा है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि फिंगर 4 तो भारत का ही इलाका है। इस विवाद को सुलझाने के लिए बैठकों का दौर चल रहा है। दोनों देशों में कुछ इलाकों से सेना को करीब 2 किलोमीटर तक पीछे हटाने की सहमति भी बनी थी, लेकिन चीनी सेना फिंगर फोर पर डट गई है और भारत को पेट्रोलिंग के लिए इससे आगे नहीं जाने दे रही। 

चीन ने फिंगर 4 तक पक्की सड़क का निर्माण किया
1999 में, कारगिल युद्ध के दौरान जब भारत ने अपने सैनिकों को पैंगोंग लेक से हटा लिया था, तब चीन ने इसका फायदा उठाकर फिंगर 4 क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक कच्ची सड़क का निर्माण किया था। बाद में इसे पक्‍का कर दिया गया। चीनी सैनिक कई बार अपने वाहनों से इस इलाके में पेट्रोलिंग के लिए आ जाते थे, लेकिन कभी भी उन्होंने इस क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया था। लेकिन अब चीनी सेना ने ऊंचाइयों पर फिंगर 4-8 के बीच डिफेंस स्‍ट्रक्‍चर तैयार कर लिए हैं। भारत अप्रैल से पहले वाली स्थिति चाहता है। इसके लिए पैंगोंग सो में चीन को अपने कई स्‍ट्रक्‍चर और बंकर ढहाने होंगे, जिसमें वक्‍त लग सकता है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।