दैनिक भास्कर हिंदी: ओवैसी की मोदी, शाह और कांग्रेस को चुनौती, हैदराबाद से चुनाव लड़कर दिखाएं

June 30th, 2018

हाईलाइट

  • ओवैसी ने पीएम मोदी और कांग्रेस को चुनौती दी है कि कोई भी पार्टी हैदराबाद से AIMIM के खिलाफ चुनाव लड़ कर दिखाएं।
  • ओवैसी ने दावा भी किया है कि उन्हें हैदराबाद से कोई भी नहीं हरा सकता।
  • ओवैसी ने कहा, हैदराबाद से AIMIM के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए सभी दलों को चुनौती देता हूं।

डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी इस बार पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देकर सुर्खियों में आ गए हैं। ओवैसी ने पीएम मोदी और अमित शाह सहित कांग्रेस को चुनौती दी है कि कोई भी पार्टी हैदराबाद से AIMIM के खिलाफ चुनाव लड़ कर दिखाएं। इतना ही नहीं ओवैसी ने दावा भी किया है कि उन्हें हैदराबाद से कोई भी नहीं हरा सकता, भले ही वो एकजुट क्यों न हो जाएं। 

 

 

एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने कहा, हैदराबाद से AIMIM के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए सभी दलों को चुनौती देता हूं। मैं पीएम मोदी या अमित शाह को यहां की सीट से चुनाव लड़ने के लिए चुनौती देता हूं। कांग्रेस को भी चुनौती देता हूं। अगर दोनों दल (कांग्रेस और बीजेपी ) एक साथ चुनाव लड़ते हैं, तो भी वो हमें हराने में सक्षम नहीं होंगे।

 

 

दरअसल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर औवैसी पहले से ही बीजेपी और कांग्रेस पर हमलावर हैं। इससे पहले ओवैसी ने आरोप लगाया था बीजेपी और कांग्रेस दोनों हिंदू वोट बैंक के लिए परेशान हैं।

 

 

उन्होंने कहा था, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। बीजेपी की तरफ से लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है। इससे जाहिर होता है कि मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण और विकास में बीजेपी को कोई दिलचस्पी नहीं है। यही हाल कांग्रेस का भी है।

 

 

कुछ दिन पहले एक सभा में मुस्लिमों को संबोधित करते हुए ओवैसी ने चुनाव में सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, अगर धर्मनिरपेक्षता को जिंदा रखना चाहते हैं, तो अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा। एकजुट होकर राजनीतिक ताकत बनना होगा। इसलिए चुनाव में सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट दें। ओवैसी का कहना है, जब मुस्लिम एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनेंगे तभी धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को ताकत मिलेगी।