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बिहार : तेज प्रताप ने बनाई नई पार्टी, नाम रखा लालू राबड़ी मोर्चा

April 01st, 2019 22:21 IST
बिहार : तेज प्रताप ने बनाई नई पार्टी, नाम रखा लालू राबड़ी मोर्चा

हाईलाइट

  • लालू के दोनों बेटों में बढ़ रही फूट
  • राजद छात्रसंघ से दे चुके हैं इस्तीफा
  • दो सीटों की मांग कर रहे थे तेज प्रताप

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार लोकसभा चुनाव में तीन सीटों की डिमांड कर रहे लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप ने नई पार्टी बना ली है। तेज प्रताप ने पार्टी का नाम लालू राबड़ी मोर्चा रखा है। नई पार्टी बनाने के बाद तेज प्रताप ने कहा कि हमने दो लोकसभा सीट जहांनाबाद और शिवहर की मांग की थी, लेकिन मांग पूरी नहीं की गई। बता दें कि कुछ समय से राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटों के बीच फूट बढ़ती जा रही है। इससे पहले तेज प्रताप राजद के छात्रसंघ संरक्षक के पद से भी इस्तीफा दे चुके हैं। तेजप्रताप ने जहांनाबाद सीट से चंद्रप्रकाश यादव को चुनाव लड़ाने का दावा भी किया है। 

यादव परिवार में बढ़ती दरार की अटकलों के बीच तेजप्रताप गुरुवार को पार्टी के खिलाफ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखने वाले थे, हालांकि लालू प्रसाद के हस्तक्षेप के बाद तेजप्रताप ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दी थी। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बिहार के दो संसदीय क्षेत्रों शिवहर और जहानाबाद के लिए लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए रखी गई थी। तेज प्रताप चाहते थे कि इन दो सीटों से उनके समर्थक मैदान में उतरे। तेज प्रताप चाहते थे कि उनके सहयोगी चंद्र प्रकाश को जहानाबाद से टिकट दिया जाए और अंगेश सिंह को शिवहर लोकसभा सीट से उतारा जाए। इसके लेकर उनके और छोटे भाई तेजस्वी यादव के बीच अनबन की खबर भी सामने आई थी। 

इसके बाद तेज प्रताप ने गुरुवार को पार्टी के छात्रसंघ संरक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया था। तेज प्रताप ने एक ट्वीट कर कहा कि 'छात्र राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक के पद से मैं इस्तीफा दे रहा हूं। नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे।' इससे पहले तेज प्रताप अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय को तलाक देने को लेकर भी सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने ऐश्वर्या के साथ अनबन के बाद तलाक देने की अर्जी दाखिल की थी।

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Vipin April 02nd, 2019 01:47 IST

बिहार के लोग जब चारा घोटाले में शामिल मंत्री की पार्टी को वोट दे सकते हैं तो चोर डाकू ko वोट देना कौन सी बड़ी बात है!

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।