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दंतेवाड़ा में बड़ा नक्सली हमला, बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत, तीन जवान शहीद

April 10th, 2019 10:26 IST
दंतेवाड़ा में बड़ा नक्सली हमला, बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत, तीन जवान शहीद

हाईलाइट

  • छत्‍तीसगढ़ में नक्‍सलियों ने बीजेपी विधायक के काफिले को निशाना बनाया।
  • इस हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौके पर ही जान चली गई।
  • उनके काफिले में शामिल पांच जवान शहीद हो गए।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से दो दिन पहले छत्‍तीसगढ़ में नक्‍सलियों ने बीजेपी विधायक के काफिले को निशाना बनाया। इस हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी और उनके ड्राइवर की मौके पर मौत हो गई। राज्य पुलिस के एस्कॉर्ट वाहन के विस्फोट की चपेट में आने से छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस के 3 जवान शहीद हो गए। एंटी नक्सल ऑपरेशन के डीआईजी पी सुंदर राज ने भीमा मंडावी की मौत की पुष्टी की है। नक्‍सली हमले के बाद दोनों ओर से फायरिंग भी हुई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हमले का बाद हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इस नक्सली हमले की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कड़ी निंदा की है।

पीएम ने कहा, 'छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं। शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को मेरी श्रद्धांजलि। इन शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।' उन्होंने कहा, 'भीमा मंडावी भाजपा के समर्पित कार्यकार्ता थे। बीजेपी के इस मेहनती और साहसी कार्यकर्ता ने छत्तीसगढ़ के लोगों की सहायता की। उनके निधन पर गहरा दुख है। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।'

दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने कहा कि 'भाजपा विधायक भीमा मंडावी को पुलिस ने इलाके का दौरा नहीं करने की सलाह दी थी। हमले के बाद, दोनों ओर से गोलीबारी करीब आधे घंटे तक जारी रही। भाजपा विधायक की कार के पीछे एक कार में 5 सुरक्षाकर्मी सवार थे।'

जानकारी के मुताबिक बीजेपी विधायक का काफिला जब नकुलनार से करीब दो किलोमीटर दूर श्यामगिरी से गुजर रहा था उस वक्त नक्‍सलियों ने IED ब्लास्ट कर इस हमले को अंजाम दिया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण दंतेवाड़ा में चुनाव प्रचार दोपहर 3 बजे ही खत्म हो गया था जिसके बाद विधायक मंडावी कुआकोण्डा ब्लॉक के श्यामगिरी गांव में चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद वापस नकुलनार लौट रहे थे। मंडावी जिस गाड़ी में सवार थे वो बुलेटप्रूफ थी, लेकिन धमाका इतना ताकतवर था कि मंडावी और सुरक्षा बलों दोनों की गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। हमले की जानकारी मिलते ही सुरक्षाबलों की टीम घटना स्थल पर पहुंच गई। बता दें कि बस्‍तर सीट पर 11 अप्रैल को मतदान होना है। नक्सली इलाके में लगातार चुनाव बहिष्कार का फरमान भी जारी करते रहे हैं।

नक्सली हमले का शिकार हुए मंडावी बीजेपी के अकेले ऐसा नेता थे जिन्होंने  2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बस्तर संभाग की 12 सीटों में से एक सीट पर जीत हासिल की थी।दंतेवाड़ा सीट पर भीमा मंडावी ने कांग्रेस की देवती कर्मा को हराया था। मंडावी  विधानसभा में भाजपा विधायक दल के उपनेता भी थे। यह पहली बार नहीं है जब बस्तर में नक्सलियों ने चुनाव से पहले किसी राजनीतिक दल के काफिले पर हमला किया है। इससे पहले 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत 30 लोगों की मौत हो गई थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।