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बिहार उपचुनाव में राजग और जदयू दोनों गठबंधन अपनों से परेशान

October 19th, 2019 11:50 IST
बिहार उपचुनाव में राजग और जदयू दोनों गठबंधन अपनों से परेशान

हाईलाइट

  • बिहार उपचुनाव में दोनों गठबंधन अपनों से परेशान

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में 21 अक्टूबर को पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में दोनों गठबंधन अपनों से परेशान हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) हो या विपक्षी दलों का महागठबंधन, दोनों ओर बागी अपने-अपने गठबंधन का खेल बिगाड़ने में लगे हुए हैं। सीवान जिले के दरौंदा विधानसभा सीट से राजग के अधिकृत प्रत्यशी जद (यू) के नेता और सीवान की सांसद कविता सिंह के पति अजय सिंह भाग्य आजमा रहे हैं, लेकिन भाजपा नेता कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास यहां निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित भाजपा के सभी नेता हालांकि अजय सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं, लेकिन कर्णजीत के चुनावी मैदान में उतर जाने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस बीच, हालांकि मतदाताओं में गलत संदेश नहीं जाने को लेकर भाजपा नेतृत्व ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में कर्णजीत को पार्टी से निलंबित कर दिया है। फिर भी कहा जा रहा है कि सिंह भाजपा के नाम पर ही वोट मांग रहे हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल कहते हैं कि भाजपा संगठन और विचारधारा की पार्टी है और भाजपा के सभी नेता व कार्यकर्ता सभी चुनाव क्षेत्रों में राजग प्रत्याशी की जीत के लिए सक्रिय हैं। उन्होंने दावा किया कि राजग के प्रत्याशी सभी सीटों पर विजयी होंगे।

इधर, महागठबंधन के अधिकृत प्रत्याशी भी अपनों से परेशान दिख रहे हैं। महागठबंधन में शामिल दलों में सीटों को लेकर तालमेल नहीं बन सका। भागलपुर के नाथनगर विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राबिया खातून को चुनावी मैदान में उतारा है, लेकिन महागठबंधन के घटक दलों में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) भी अजय राय के रूप में अपना प्रत्याशी उतारकर महागठबंधन का खेल बिगाड़ने में जुटा है।

इसी तरह, उपचुनाव में सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में भी महागठबंधन में शामिल दो घटक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। महागठबंधन की ओर से राजद ने यहां जफर आलम को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन यहां भी महागठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने दिनेश यादव को चुनावी मैदान में उतार दिया है। दोनों गठबंधनों के अलावा वामपंथी दलों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही बनी हुई है।

सीवान जिले की दरौंदा विधानसभा सीट पर भाकपा-माले और भाकपा अपने-अपने प्रत्याशी उतारकर एक-दूसरे के खिलाफ खम ठोंक रहे हैं।इस उपचुनाव में भाकपा ने दरौंदा में भरत सिंह, नाथनगर में सुधीर शर्मा और किशनगंज में फिरोज आलम को अपना उम्मीदवार बनाया है। इन तीनों सीटों को छोड़कर शेष के दो सीटों- सिमरी बख्तियारपुर और बेलहर में उसने राजद के उम्मीदवारों को समर्थन देने का फैसला लिया है।इधर, भाकपा माले ने भी दरौंदा से जयशंकर पंडित को अपना प्रत्याशी बनाया है।सभी सीटों पर 21 अक्टूबर को मतदान और 24 अक्टूबर को मतगणना होनी है।

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राजस्थान में सियासी घमासान फिर तेज, मंत्रिमंडल विस्तार पर गहलोत-पायलट आमने सामने


डिजिटल डेस्क, जयपुर। पंजाब में जब से कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर कांग्रेस प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया है, तब से राजस्थान में पायलट गुट का भी जोश हाई है। अब पायलट गुट के दबाव के कारण मंत्रिमंडल पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच तलवारें खिंच गईं हैं,  दोनों गुट आमने-सामने आ गये हैं। फिलहाल विस्तार की कोई तारीख तय नहीं है लेकिन यह माना जा रहा है कि अगले महीने इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अभी गहलोत कैबिनेट में 9 पद खाली हैं। अगर कांग्रेस 'एक व्यक्ति एक पद' के फॉर्मूले को मानती है तो शिक्षा राज्य मंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा को अपना पद छोड़ना होगा। वैसे गोविंद डोटासरा ने यह कहकर कि 'मैं दो-चार दिन का मेहमान हूं' अपने जाने के संकेत दे दिये हैं। एक पद विधानसभा उपाध्यक्ष का भी खाली है।   
 
आंकड़ों के हिसाब से गहलोत कैबिनेट में कुल 11 पद खाली हैं। लेकिन इन सभी पदों पर फिलहाल मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। अंदेशा है कि विस्तार के बाद भी नाराजगी रह सकती है। उन हालातों का सामना करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में दो या तीन पद खाली ही रखे जाएंगे। 
मत्रिमंडल विस्तार पर अगर पूरी तरह गहलोत हावी रहे तो 2 या 3 ही मंत्रियों की छुट्टी होगी। पर ये फैसला लेना भी गहलोत के लिए आसान नहीं होगा,  क्योंकि उन्हें उन लोगों के बीच फैसला लेना होगा जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया था। 
अगर विस्तार पर पायलट गुट का दबाव रहा तो फिर 6 से 7 मंत्री आउट होना तय माने जा रहे हैं। और, अगर आलाकमान ने प्रदर्शन को आधार माना तो कई मंत्रियों को जाना पड़ सकता है, लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। हालांकि, अजय माकन का 28-29 को जयपुर दौरा है। जिसमें वह जयपुर आकर हर विधायक से बात करेंगे। उसके बाद यह तय होगा कि कौन रहेगा और कौन जाएगा?   

इन मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा


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इनकी हो सकती मंत्रिमंडल में एंट्री- पायलट गुट के 3 और गहलोत गुट के 7 चहेरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 

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डोटासरा के बयान से उनके जाने के संकेत

प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाऐं जारी हैं उस बीच शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर छा गया है। इसमें उनको राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली से कहते सुना जा सकता हैं- ‘मेरे पास एक घंटे फाइल नहीं रुकेगी, आप सोमवार को आ जाओ। एक मिनट में निकाल दूंगा, जितनी कहोगे। मैं दो-पांच दिन का ही मेहमान हूं। मुझसे जो कराना है करा लो।’ इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष डीपी जारोली ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं आता हूं सर। इस वायरल वीडियो के बाद से ये कयास तेज हो गए हैं कि मंत्रिमंडल से डोटासरा की रवानगी तय है। 
 

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।