दैनिक भास्कर हिंदी: मिशन गठबंधन: राहुल से मिले चंद्रबाबू, अखिलेश-माया से भी की मुलाकात

May 18th, 2019

हाईलाइट

  • नई सरकार बनाने के लिए एकजुट हो रहा विपक्ष 
  • कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी से मिल चुके हैं नायडू

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के सातवें चरण का चुनाव प्रचार खत्म होते ही विपक्ष मोदी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश में लग गया है। नतीजों से पहले ही नई सरकार के लिए टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी नेताओं को एकजुट करने की कवायद के तहत उनसे मिलना शुरू कर दिया है। मिशन गठबंधन को लेकर चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, अखिलेष यादव और मायवती से मुलाकात की। दिल्ली में राहुल के आवास पर नायडू ने बीजेपी विरोधी मोर्चे को और मजबूत बनाने पर चर्चा की।

चंद्रबाबू नायडू ने शरद यादव से भी मुलाकात की। नायडू से मिलने के बाद शरद यादव ने कहा, मुलाकात का दौर चल रहा है। नायडू सबसे मिलकर चर्चा कर रहे हैं कि क्या करना है, कैसे करना है। उन्होंने दावा किया है कि, बीजेपी हार रही है। शरद ने कहा, जो मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं उन्हें भगवान भी नहीं जिता सकते। भगवान के पास कितना भी जाएं लेकिन जनता जरूर हराएगी। उन्होंने कहा, गैर एनडीए दलों में एकता है।

 

मायावती और अखिलेश से भी मिलेंगे
नायडू ने लखनऊ में बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने चुनावी नतीजों के बाद उभरने वाली सियासी तस्वीर पर मंथन किया। इससे पहले शुक्रवार को नायडू ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी से मुलाकात की थी। 

केजरीवाल से भी की बातचीत
सिंघवी के बाद नायडू आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिले थे। दोनों नेताओं के बीच नतीजों के बाद की रणनीति पर बातचीत हुई। केजरीवाल से मुलाकात के बाद नायडू ने लेफ्ट नेताओं के साथ भी गठबंधन से सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह भी मौजूद रहे।

चंद्रशेखर राव भी विपक्ष को कर रहे एकजुट
नायडू के अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी विपक्ष को एकजुट करने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। 6वें चरण के चुनाव के बाद चंद्रशेखर राव ने केरल के मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनाराई विजयन से मुलाकात की थी। इसके बाद वह चेन्नई जाकर डीएमके नेता एमके स्टालिन से मिले। हालांकि मुलाकात के बाद डीएमके ने कांग्रेस का साथ छोड़ने से इंकार कर दिया था।

 

 

 

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