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म्यांमार और भारत में हथियार धकेल रहा चीन, क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा

November 17th, 2020 19:30 IST
 म्यांमार और भारत में हथियार धकेल रहा चीन, क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा

हाईलाइट

  • म्यांमार और भारत में हथियार धकेल रहा चीन, क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा

नई दिल्ली, 17 नवंबर (आईएएनएस)। म्यांमार और भारत में अवैध रूप से चीनी हथियारों का आसान प्रवाह क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहा है। खुफिया एजेंसियों ने इस संबंध में भारत सरकार को सतर्क किया है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से इस साल अब तक एके-47, एम-16एस, चीनी पिस्तौल और लेथोड्स सहित कुल 423 अवैध हथियार बरामद किए गए हैं।

खुफिया एजेंसियों ने यह भी कहा है कि चीन म्यांमार सीमा पर विद्रोही समूहों को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है, क्योंकि वे अच्छी कीमत चुकाते हैं।

एजेंसियों ने सरकार को सतर्क करते हुए कहा, प्रमुख विद्रोही समूहों विशेष रूप से असम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम के लोग चीनी खुफिया एजेंसियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखते हैं और ये चीनी उदारता और हथियारों से लाभान्वित हुए हैं।

एजेंसियों ने बताया है कि उत्तर-पूर्व में विद्रोही समूहों का प्रशिक्षण, हथियारों एवं गोला-बारूद की पहुंच और निर्वासित आतंकवादियों और नेताओं को शरण देना भारत के खिलाफ चीन के द्वि-आतंकवाद के आवर्ती (रीकरंट) पहलू हैं।

म्यांमार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह हिंद महासागर के व्यापार मार्गो के लिए एक वैकल्पिक भूमि पुल प्रदान करता है, मलक्का स्ट्रैट्स पर दबाव को कम करता है और यूनान प्रांत के विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का एक खजाना है।

सूत्रों ने कहा कि हाल ही में एके-47 असॉल्ट राइफलों, मशीनगन, एंटी टैंक माइंस, ग्रेनेड सहित करीब 10 लाख डॉलर के गोला-बारूद से युक्त चीन निर्मित हथियारों की एक बड़ी खेप म्यांमार-थाईलैंड की सीमा पर थाईलैंड की तरफ माई सोट जिले में जब्त की गई है।

चीनी हथियारों की यह एकमात्र खेप नहीं है, जो बरामद हुई है। इस साल की शुरुआत में म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय जंक्शन के पास मोनाखाली बीच पर 500 असॉल्ट राइफल, 30 यूनिवर्सल मशीनगन, 70,000 गोला बारूद, ग्रेनेड का एक विशाल भंडार और एफ-6 चीनी मैनपैड्स धकेली गई थी। वहां से यह खेप संडाक में अराकान आर्मी कैंप तक पहुंची और फिर इसे दक्षिण मिजोरम में परवा कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हुए राखाइन में तस्करी कर लाया गया।

जब्त किए गए हथियार मूल चीनी निर्मित थे और म्यांमार सीमा पर विद्रोही समूहों के लिए तस्करी किए जाने के लिए थे, क्योंकि वे अच्छी कीमत देते हैं।

म्यांमार में, चीन वर्तमान में अराकान सेना को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है, जो म्यांमार की सीमा से लगे चिन और राखीन राज्यों में सक्रिय है।

चीन अब अराकान आर्मी का उपयोग कर रहा है, जो कि म्यांमार द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में घोषित किया गया है।

2019 में जब कलादान परियोजना का एक चरण पूरा होने वाला था, अराकान सेना ने अपने ऑपरेशन के क्षेत्र को रखाइन और दक्षिणी चिन में स्थानांतरित कर दिया था।

2019 में अराकान सेना और म्यांमार के बीच 593 से अधिक झड़पें हुईं, जिनमें से अधिकांश कलादान परियोजना के करीब थीं।

सूत्रों ने कहा कि चीन अराकन सेना की फंडिंग का 95 प्रतिशत तक प्रदान करता है।

बांग्लादेश और थाईलैंड के माध्यम से आपूर्ति किए गए चीनी हथियार स्पष्ट करते हैं कि म्यांमार में भारत द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट खतरे में हैं।

एकेके/एसजीके

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।