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CJI गोगोई कार्यकाल खत्म, आखिरी दिन 3 मिनट में जारी किए 10 नोटिस

CJI गोगोई कार्यकाल खत्म, आखिरी दिन 3 मिनट में जारी किए 10 नोटिस

हाईलाइट

  • चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई का कार्यकाल शुक्रवार को खत्म
  • देश के सबसे बड़े विवादित अयोध्या मामले में फैसला सुनाया
  • 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे नए मुख्य न्यायधीश के तौर पर शपथ लेंगे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अयोध्या के विवादित राम जन्मभूमि पर फैसला देने वाले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई का कार्यकाल शुक्रवार को खत्म हो गया है। वे अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कुछ देर के लिए कोर्ट पहुंचे। परंपरा के मुताबिक CJI गोगोई अपने उत्तराधिकारी जस्टिस एसए बोबड़े के साथ कोर्ट रूम में बैठे। इस दौरान उन्होंने यहां सिर्फ 3 मिनट के अंदर 10 मुकदमों में नोटिस भी जारी किए। वैसे तो 17 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल का अंतिम दिन है, लेकिन इस दिन रविवार होने की वजह से अवकाश रहेगा। उनका कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा। इस दौरान उन्होंने कुल 47 फैसले सुनाए।

चीफ जस्टिस गोगोई से इस दौरान कुछ पत्रकारों ने इंटरव्यू की अपील की, लेकिन उन्होंने पत्रकारों से बात करने से इनकार कर दिया। बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित फेयरवेल फंक्शन में भी CJI संबोधन नहीं देंगे। 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे नए मुख्य न्यायधीश के तौर पर शपथ लेंगे। इस प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश खन्ना ने सभी की तरफ से जस्टिस गोगोई का धन्यवाद किया और शुभकामनाएं दीं। इस दौरान जस्टिस गोगोई ने सभी का शुक्रिया किया, कक्ष में मौजूद सभी लोगों से हाथ जोड़कर अलविदा लिया

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने हाल ही में अयोध्या केस, चीफ जस्टिस के ऑफिस को आरटीआई के दायरे में लाने, राफेल डील, सबरीमाला मंदिर से जुड़े अहम मुद्दे पर फैसला दिया। इनमें कई ऐसे मामले भी शामिल रहे, जिसे ऐतिहासिक फैसले के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

अयोध्या मामला- चीफ जस्टिस रंजन गोगाई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने विवादित जमीन राम लाल विराजमान को देने का फैसला सुनाया है। इसके साथ सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए साथ ही केंद्र सरकार तीन महीने में इसकी योजना तैयार करे। वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का भी फैसला किया। सीजेआई ने कहा कि ये 5 एकड़ जमीन या तो अधिग्रहित जमीन से दी जाए या फिर अयोध्या में कहीं भी दी जाए।

सबरीमाला मामला- सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई गोगोई बेंच ने सबरीमाला मंदिर पर महिलाओं के प्रवेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार करने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस मामले को बड़ी बेंच में रेफर कर दिया है। अब सात जजों की बेंच इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। दो जजों की असहमति के बाद यह केस बड़ी बेंच को सौंपा गया है। सबरीमाला केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस का असर सिर्फ इस मंदिर नहीं, बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, अग्यारी में पारसी महिलाओं के प्रवेश पर भी पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परंपराएं धर्म के सर्वोच्च सर्वमान्य नियमों के मुताबिक होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस का दफ्तर आरटीआई के दायरे में- देश के प्रधान न्यायाधीश का दफ्तर अब सूचना के अधिकार कानून के दायरे आएगा। हालांकि, निजता और गोपनीयता का अधिकार बरकरार रहेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने इस पर फैसला सुनाया। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस का दफ्तर आरटीआई के दायरे में कुछ शर्तों के साथ आएगा।

सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी- चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और पीसी घोष की पीठ ने सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर लगाने पर पाबंदी लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद किसी भी सरकारी विज्ञापन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री के अलावा किसी भी नेता की तस्वीर प्रकाशित करने पर रोक लगा दी गई है।

सात भाषाओं में कोर्ट का फैसला- चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा सात अन्य भाषाओं में प्रकाशित करने का फैसला दिया था। इस फैसले से पहले तक केवल अंग्रेजी भाषा में ही फैसला प्रकाशित किया जाता था। कई बार मामले के पक्षकार अंग्रेजी भाषा को समझ नहीं पाते थे, उनकी मांग थी कि कई और भाषाओं में भी फैसले की कॉपी प्रकाशित की जानी चाहिए।

जस्टिस रंजन गोगोई असम से ताल्लुक रखते हैं। वे पूर्व चीफ जस्टिस मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट में सबसे सीनियर थे। इससे पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। चीफ जस्टिस बनने से पहले वे सुप्रीम कोर्ट में सीनियर जज थे। जस्टिस गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ था। 1978 में वकालत शुरू करने वाले जस्टिस गोगोई को 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट का जज बनाया गया था। इसके 9 साल बाद 9 सितंबर 2010 को उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ था। आपको बता दें, उनके पिता केसब चंद्र गोगोई भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने 1982 में 2 महीने के लिए असम के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था।

रंजन गोगोई 18 नवंबर को 65 साल के हो जाएंगे और संविधान में चीफ जस्टिस के रिटायर होने की उम्र 65 साल है। एडवोकेट उपेंद्र मिश्र ने बताया कि 18 नवंबर को रंजन गोगोई का चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद अपना पहला जन्मदिन मनाएंगे। बता दें कि उन्हें 3 अक्टूबर 2018 को भारत का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1978 में बतौर एडवोकेट अपने करियर की शुरुआत की थी।

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