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Coronavirus in Delhi: जांच के नियमों का उल्लंघन करने पर गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर दर्ज 

June 06th, 2020 22:47 IST
Coronavirus in Delhi: जांच के नियमों का उल्लंघन करने पर गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर दर्ज 

हाईलाइट

  • दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली वालों के इलाज पर केजरीवाल कैबिनेट रविवार को फैसला लेगी
  • कोरोना के बढ़ते मामलों पर बढ़ी सरकार की चिंता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के निजी अस्पतालों को चेतावनी देने के कुछ ही घंटे बाद राज्य सरकार की शिकायत के बाद कोरोनो वायरस जांच को लेकर आईसीएमआर के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में यहां सर गंगाराम अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। निजी अस्पताल को इस संबंध में 3 जून को दिल्ली सरकार द्वारा एक निर्देश जारी किया गया था। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के उप सचिव अमित कुमार पमासी द्वारा दायर शिकायत में कहा गया कि अस्पताल कोरोना के नमूने एकत्र करते समय आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा था, जो कि अनिवार्य है। परीक्षण दिशानिर्देशों को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा तय किया गया है।

सीडीएमओ-कम-मिशन डायरेक्टर (सेंट्रल) ने उल्लेख किया है कि सर गंगाराम अस्पताल अभी भी 3 जून तक आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा था, जो कि महामारी रोग कोविड-19 विनियम 2020 के तहत जारी निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। एफआईआर में यह कहा गया है। इससे पहले, केजरीवाल ने कोरोनोवायरस रोगियों को भर्ती करने से इनकार करने पर निजी अस्पतालों को कड़ी चेतावनी दी थी और कहा था कि दिल्ली सरकार ऐसे अस्पतालों में स्वास्थ्य अधिकारियों को तैनात करेगी जो प्रत्येक कोरोना रोगी को बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करें। केजरीवाल ने ऐसे मरीजों का इलाज करने से इनकार करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

केजरीवाल ने कहा, मरीज़ को भर्ती करना ही होगा
कोविड-19 संक्रमण के संदिग्ध मरीजों के लिए भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक नया आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मरीज गंभीर स्थिति में है और उसे सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है तो कुछ अस्पताल उसे भर्ती करने से इनकार कर देते हैं। आज मैं आदेश देता हूं कि किसी संदिग्ध मरीज को कोई अस्पताल भर्ती करने से इनकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने ये भी कहा कि दिल्ली में टेस्टिंग बंद नहीं हुई है और शनिवार सुबह तक 5300 सैंपल्स की टेस्टिंग हुई है।

दिल्ली में सरकारी और निजी मिलाकर 42 लैब में हो रही टेस्टिंग
सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 42 लैब में टेस्टिंग होती हैं उनमें से छह लैब में गड़बड़ी हो रही थी। हमने सिर्फ उन छह के खिलाफ एक्शन लिया है, 36 अब भी काम कर रही हैं। दिल्ली में सरकार के 17 कोविड टेस्टिंग सेंटर हैं। इसके साथ ही हर सरकारी और निजी अस्पताल में फ्लू क्लीनिक हैं, जहां टेस्ट होता है। इसके अलावा आप किसी प्राइवेट लैब से भी संपर्क कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री केजरीवाल की चेतावनी
दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने सभी अस्पतालों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कोई भी शख्स इलाज के लिए आता है तो उसका इलाज करना होगा। किसी व्यक्ति को अस्पताल में इलाज करवाने में दिक्कत न हो यह सुनिश्चित करवाने के लिए अब से सभी कोविड अस्पतालों में दिल्ली सरकार एक प्रोफेशनल नियुक्त करेगी। अस्पताल के अंदर मौजूद प्रोफेशनल जानकारी देगा कि अस्पताल में बेड मौजूद है या नहीं। जो बाद में ऐप पर भी डाला जाएगा, जिससे लोगों तक अस्पताल के अंदर बेड की सही जानकारी पहुंच सके।

दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली वालों के इलाज पर फैसला आज
वहीं दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार रविवार को एक अहम फैसला लेने जा रही है कि क्या स्थानीय अस्पतालों में दिल्ली के लोगों का ही इलाज होगा या बाहरी लोगों को भी यह सुविधा मिल सकती है। बता दें, दिल्ली में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर शनिवार को डॉ. महेश वर्मा कमेटी ने दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली का हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर केवल दिल्ली के लोगों के लिए इस्तेमाल हो। अगर बाहर वालों के लिए दिल्ली का हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर खोला गया तो 3 दिन के अंदर सारे बेड भर जाएंगे। डॉ. महेश वर्मा कमेटी की इस रिपोर्ट पर रविवार 11.30 बजे दिल्ली कैबिनेट की बैठक होने वाली है। इस बैठक के बाद तय होगा कि दिल्ली के हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर दूसरे राज्यों के लिए खोले जाएं या नहीं।

कोरोना के बढ़ते मामलों पर बढ़ी सरकार की चिंता 
कोरोना के बढ़ते मामलों पर सरकार में चिंता है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि राजधानी से जिस तरह से कोरोना के मामले आ रहे हैं वो चिंताजनक है। दिल्ली सरकार ने 8500 बेड का इंतजाम किया है। इनमें से 45 फीसदी बेड पर मरीज हैं और आगे बेड बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा, लॉकडाउन से पता चला कि कोरोना इतनी जल्दी जाने वाला नहीं है। अब इससे बचने के बारे में सीखना होगा। मास्क पहनना, हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है। इससे ही वायरस को बढ़ने से रोक सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।