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Coronavirus in MP: कोरोना वायरस से चौथी मौत, 8 नए मामले, संक्रमितों की संख्या पहुंची 47


हाईलाइट

  • 24 घंटों में मप्र में 8 नए मामले, 52 साल के व्यक्ति की मौत
  • इंदौर में सबसे ज्यादा 27 संक्रमित, 2 की मौत

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या और मौत का आंकड़े में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते 24 घंटों में 8 नए मरीज सामने आए हैं, जिससे मरीजों की संख्या में बढ़कर 47 हो गई है। वहीं इंदौर में 41 वर्षीय पुरुष के सोमवार तड़के दम तोड़ने के बाद राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की मौत की संख्या बढ़कर चार हो गई है।  इनमें दो इंदौर और दो उज्जैन के रहने वाले थे। इससे पहले उज्जैन के रहने वाले 37 साल के युवक की 3 दिन पहले ही मौत हो गई थी।

बता दें कि राज्य में सबसे बुरा हाल इंदौर का है, जहां मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यहां बीते 24 घंटों में 7 मरीज नए सामने आए हैं। वहीं पूरे प्रदेश में अब तक इंदौर में 27, उज्जैन में 5, जबलपुर में 8, भोपाल में 3, ग्वालियर और शिवपुरी में 2-2 संक्रमित मिले हैं। इंदौर को 3 दिन के लिए पूरी तरह लॉकडाउन कर दिया गया। यहां किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। दूध-दवाएं, सब्जी और किराना स्टोर्स सब बंद हैं। इसका उल्लंघन करने पर जेल जाना पड़ेगा। इसके लिए इंदौर प्रशासन ने खुली जेल भी बनाई है। भोपाल-इंदौर सीमा सील है। लोगों को हेल्थ चेकअप के बाद ही एंट्री मिलेगी। उन्हें वाजिब कारण भी बताना होगा। राजधानी में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मस्जिदों से भी लगातार लाउडस्पीकर पर अपील की जा रही है कि नमाज घर में ही अदा करें।

इंमरजेंस सेवाओं को रहेगी छूट
सरकार ने इंदौर को लेकर खास रणनीति पर काम शुरू किया है। इसके चलते आज से तीन दिन का टोटल लॉकडाउन किया गया है। सेमवार को पूरे दिन दूध, दवा, सब्जी सहित अन्य जरूरी सामान लोगों को उपलब्ध नहीं हो पाया। कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि पूर्ण तालाबंदी के दौरान मंगलवार (31 मार्च) से आवश्यक वस्तुओं, खाद्य सामग्री, गैस और दवा कंपनी के कर्मचारियों को छूट दी जा रही है।

सिर्फ दूध विक्रताओं को सुबह 8 से 10 बजे तक छूट
जारी आदेश के अनुसार, जिला प्रशासन द्वारा दूध वाहन और दूध विक्रेताओं को आने-जाने और प्रात: 8 बजे से 10 बजे तक घर-घर दूध प्रदाय करने की छूट दी गई है। इंदौर शहर के किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थिति में घर से बाहर जाकर दूध लाने या अन्य कार्य की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह गैस सिलेंडर घर पहुंचाने के लए डिलिवरी ब्वॉय व वाहन चालक को छूट रहेगी।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।