comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

Delhi Violence: अदालत ने खालिद, इमाम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया

November 24th, 2020 23:31 IST
Delhi Violence: अदालत ने खालिद, इमाम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया

हाईलाइट

  • उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा का मामला
  • अदालत ने खालिद, इमाम के खिलाफ पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में कथित साजिश से जुड़े एक मामले में दायर हालिया पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आदेश में कहा, आरोपपत्र और दस्तावेजों के अध्ययन के बाद अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सामग्री है।

अदालत ने आरोपियों के वकील को दो दिसंबर की दोपहर आरोपपत्र (चार्जशीट) की सॉफ्ट कॉपी क्लेक्ट करने का निर्देश दिया है। जमानत पर चल रहे फैजान को 22 दिसंबर को तलब किया गया है।अदालत ने कहा, चूंकि दो आरोपी व्यक्ति शरजील इमाम और उमर खालिद वेबेक्स ऐप के माध्यम से अपने वकील के साथ मौजूद हैं, इसलिए समन जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

तीनों के खिलाफ रविवार को दिल्ली पुलिस ने 930 पन्नों की पूरक चार्जशीट दायर की थी। यह मामला दंगों को उकसाने के एक षड्यंत्र से संबंधित है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 748 लोग घायल हुए थे। पुलिस ने दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा खालिद और अन्य लोगों द्वारा कथित तौर पर रची गई एक पूर्व-निर्धारित साजिश थी।

तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र में कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और आपराधिक साजिश, हत्या, दंगा, राजद्रोह, गैरकानूनी तरीके से भीड़ एकत्र करने से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराएं जोड़ी गई हैं। उन पर धर्म, भाषा और जाति के आधार पर लोगों के बीच बैर बढ़ाने का भी आरोप है।

15 लोगों के खिलाफ मामले में पहली 17,500 पन्नों की चार्जशीट दिल्ली पुलिस ने दो महीने पहले दायर की थी। इसमें ताहिर हुसैन, सफूरा जरगर, गुलफिशा खातून, देवांगना कलिता, शफा-उर-रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, नताशा नरवाल, अब्दुल खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, शादाब अहमद, तल्सीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद अतहर खान के नाम शामिल हैं।

कमेंट करें
S3foX
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।