comScore

Nisarga Cyclone: महाराष्ट्र में दो की जान गई, मुंबई ने ली राहत की सांस, मध्यप्रदेश की ओर बढ़ा तूफान

Nisarga Cyclone: महाराष्ट्र में दो की जान गई, मुंबई ने ली राहत की सांस, मध्यप्रदेश की ओर बढ़ा तूफान

हाईलाइट

  • निसर्ग दोपहर 12.30 बजे अलीबाग के तट से टकराया
  • मुंबई में रनवे से कार्गो प्लेन फिसलने के बाद शाम 7 बजे तक ऑपरेशन रोका गया
  • तूफान गुजरात से नहीं टकराया, पर द्वारका में ऊंचा ज्वार उठा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान निसर्ग अब रायगढ़ और पुणे से गुजर रहा है। इस दौरान यहां हवा की गति 60 किलोमीटर प्रतिघंटा है। बता दें कि बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे जब यह अलीबाग के तट से टकाराया, तब हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा थी। मुंबई में इसके असर के चलते बारिश हुई, पेड़ उखड़े और मकानों की छतें उड़ गईं। उतना नुकसान नहीं हुआ, जिसकी आशंका जाहिर की कई थी। 6.30 बजे यह रायगण और पुणे पहुंचा। वहीं प्रदेशभर में कई जगहों पर तेज हवा और आंधी के कारण करीब 196 पेड़ उखड़ गए। इस कारण करीब 9 मकानों को नुकसान हुआ और कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त को गईं। वहीं राज्य में तूफान के कारण दो लोगों मौत हुई है।

तूफान निसर्ग दोपहर करीब एक बजे महाराष्ट्र तट से टकराया और अगले तीन घंटे तक लैंडफॉल प्रक्रिया चली। इसी के साथ रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, अलीबाग सहित कई इलाकों में तेज बारिश और हवाओं का दौर शुरू हो गया। मुंबई-पुणे में तूफान के कारण कई पेड़ गिर गए वहीं अलीबाग में भी तूफान ने कहर मचाया। राज्य में एनडीआरएफ की 21 टीमें तैनात हैं और करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है। इसके अलावा कोस्ट गार्ड की टीमों को भी प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। हालांकि गुजरात में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। यहां 67 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। निसर्ग तूफान महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले से होते हुए नासिक और मध्यप्रदेश की तरफ बढ़ गया है।

नुकसान: रायगढ़ और पुणे में एक-एक व्यक्ति की मौत
रायगढ़ में बिजली का खंभा गिरने और पुणे में दीवार गिरने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई और 5 लोग घायल हैं। तूफान के चलते मुंबई एयरपोर्ट पर एक विमान की लैंडिंग में भी दिक्कत आई थी, इसके बाद शाम 7 बजे तक वहां विमानों का ऑपरेशन रोका गया था। इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में...

  • 196 पेड़ उखड़ गए निसर्ग तूफान के कारण
  • 9 से ज्यादा मकानों को नुकसान हुआ
  • 93 जगह शॉट सर्किट की खबर आई
  • पेड़ों के गिरने से कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त

कमजोर पड़ने लगा तूफान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवाओं के साथ बुधवार की दोपहर महाराष्ट्र के तट पर पहुंचा भीषण चक्रवात निसर्ग अब कमजोर पड़ने लगा है और इसकी तीव्रता और घट जाएगी। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्यंजय महापात्रा ने कहा कि चक्रवात ने दोपहर साढ़े बारह बजे अलीबाग में दस्तक देना शुरू किया और यह प्रक्रिया दोपहर ढाई बजे पूरी हो गई। विभाग के बुलेटिन में कहा गया है कि तूफान शाम तक और कमजोर होकर देर रात तक हवा के कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो जाएगा।

मुख्य अपडेट

  • मुंबई में बीकेसी अस्पताल के करीब 1000 कोरोना मरीजों को एहतियात के तौर पर वहां से हटाकर एक सुरक्षित जगह रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि सारे मरीज सुरक्षित हैं और उस अस्थाई जगह को भी किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
  • निसर्ग तूफान ने मुंबई को छोड़ते हुए दक्षिण में रायगढ़ जिले की तरफ लैंडफॉल किया। मुंबई में किसी की जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन तटीय महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में संपंत्ति को काफी नुकसान हुआ।
  • रायगढ़ के अलीबाग, मुरुद और श्रीवर्धन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए जहां 100-120 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चल रहीं थीं।
  • कई जगहों पर पेड़ गिरे पड़े हैं और NDRF की टीमें रोड को क्लियर करने में लगीं हैं, लेकिन कितना नुकसान हुआ है। इसका सही अंदाजा गुरुवार सुबह तक ही लगाया जा सकता है।
  • तूफान से दक्षिण मुंबई की एक रिहायशी बिल्डिंग का शेड उड़ा। मरीन ड्राइव के पास सीबीआई लेन पर पेड़ गिर गए, जिससे एक टैक्सी बुरी तरह क्षतिग्रस्त गई है।
  • महाराष्ट्र के 21 और गुजरात के 16 जिलों में तूफान का असर है। दोनों राज्यों में एनडीआरएफ ने एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
कमेंट करें
v4nC3
NEXT STORY

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।