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दिल्ली पॉल्यूशन: पराली की समस्या से निपटने के लिए केंद्र ने उठाए कई कदम

दिल्ली पॉल्यूशन: पराली की समस्या से निपटने के लिए केंद्र ने उठाए कई कदम

हाईलाइट

  • पराली नष्ट करने के उपकरणों की खरीद पर मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट
  • कई तरह की योजनाएं अमल में लाई जा रही हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की खराब होती स्थिति के लिए अहम कारक मानी जा रही पराली को लेकर केन्द्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने खेतों में फसलों के अवशेष पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके तहत किसानों को तकनीकी तरीके से फसल अवशेष नष्ट करने के लिए उपकरणों की खरीद पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके अलावा भी कई तरह की योजनाएं अमल में लाई जा रही है।

कृषि मंत्रालय ने केंद्र में पहले से गठित समिति के आधार पर एक योजना तैयार की है, जिसे वर्ष 2018-19 के बजट में शामिल किया गया था। केंद्र सरकार की इस योजना को 1151.80 करोड़ रुपए की लागत से पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश और दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक लागू किया जाना है। 

इसके तहत पराली निपटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी उपकरण सरकार की ओर से रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना के लागू होने के एक सााल के अंदर देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में आठ लाख हेक्टेयर भूमि पर 500 करोड़ रुपए के खर्च से हैप्पी सीडर/जीरो टिलेज तकनीक इस्तेमाल में लाई गई। 

योजना के तहत किसानों को तकनीकी तरीके से फसल अवशेष निपटाने के उपकरणों की खरीद पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। वर्ष 2018-19 के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश को क्रमश: 269.38, 137.84 और 148.60 करोड़ रुपए जारी किए गए। वर्ष 2019-20 के दौरान इन तीनों राज्यों को क्रमश: 273.80, 192.06 और 105.29 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। 

इन पैसों की मदद से अब तक 29,488 मशीनें खरीदी गई हैं। बता दें कि इससे पहले पराली जलाने के कारण दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में होने वाले वायु प्रदूषण के संबंध में 2017 में प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।

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