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लद्दाख: नरम पड़े चीन के तेवर, लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा- मामला शांति से सुलझाने को तैयार ड्रैगन

June 07th, 2020 11:50 IST
लद्दाख: नरम पड़े चीन के तेवर, लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा- मामला शांति से सुलझाने को तैयार ड्रैगन

हाईलाइट

  • मोल्डो में भारत और चीन के अधिकारियों में शनिवार को हुई बातचीत
  • दोनों देश पूरे विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से हल निकालने पर सहमत
  • विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बेहद अच्‍छे माहौल में बातचीत हुई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में महीने भर से भारत-चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर शनिवार को दोनों पक्षों की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई। इस बैठक के बाद चीन के तेवर नरम पड़ गए हैं। अब चीन पूरे विवाद को शांतिपर्ण ढंग से सुलझाने के लिए तैयार हो गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने आज (7 जून) सुबह जारी बयान में कहा कि दोनों पक्ष 'द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक सीमाई इलाकों में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत' हैं। दोनों ही पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में ​स्थिति का हल निकालने और शांति सुनिश्चित करने और लिए दोनों पक्ष सैन्य और कूटनीतिक तौर पर जुड़े रहेंगे। चीन ने लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) पर पिछले कुछ हफ्तों से आक्रामक रुख अपनाया हुआ था। कई दौर की बातचीत अबतक बेनतीजा रही थी।

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांतिपूर्वक हल निकालने के लिए सहमत हुए हैं, ये फैसला विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों और नेताओं के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने डिप्‍लोमेटिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ को भी याद किया। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि मसले का जल्‍द हल निकलने से रिश्‍ते आगे बढ़ेंगे। बता दें कि शनिवार को दोनों पक्षों की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था, जबकि तिब्बत सैन्य जिला कमांडर ने चीन का पक्ष रखा। 

अभी जारी रहेगी बातचीत
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि चीन से मिलिट्री और डिप्‍लोमेटिक लेवल पर बातचीत चलती रहेगी। लद्दाख में सीमा पर दोनों देशों की ओर से भारी संख्‍या में सैनिक जुटे हुए हैं। उन्‍हें वापस बुलाने पर कोई फैसला हुआ है या नहीं, इसपर विदेश मंत्रालय ने कुछ नहीं कहा। माना यही जा रहा है कि अगले दौर की बातचीत में तनाव कम करने की एक रूपरेखा तैयार हो सकती है।

कई दौर की बातचीत के बाद शांति पर सहमति
शनिवार को दोनों देशों की तरफ से हुई लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत से पहले स्थानीय कमांडरों के स्तर पर दोनों सेनाओं के बीच 12 राउंड बातचीत हो चुकी थी। इसके अलावा 3 बार मेजर जनरल लेवल पर भी बातचीत हो चुकी थी। कई दौर की बातचीत में कोई हल नहीं निकलने के बाद इतने बड़े स्तर पर बातचीत का फैसला हुआ।

तीन से चार स्थानों पर तैनात हैं दोनों देशों की सेनाएं
दोनों ओर से सेना तैनात हैं और ऐसे तीन से चार स्थान हैं, जहां पांच मई से ही दोनों ओर के सुरक्षाबल आमने-सामने हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास दोनों पक्षों ने चार स्थानों पर 1000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र और गलवान घाटी क्षेत्र में कड़ी निगरानी बनाए हुए है। इस क्षेत्र में चीन ने भी तैनाती बढ़ाई हुई है। पैंगोंग त्सो के अलावा ट्रिग हाइट्स, डेमचोक और चुमार ऐसे क्षेत्र हैं जो बेहद संवेदनशील हैं।

5 और 6 मई को सैनिकों के बीच हुई थी झड़प
उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में पांच व छह मई को भारत व चीनी सेना के बीच झपड़ हो गई थी। दोनों सेनाओं के बीच पांच मई को तनाव बढ़ा था और छह मई की सुबह तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। इस झड़प के दौरान दोनों पक्षों के सैनिकों के घायल होने की खबरें भी आई थीं। सूत्रों ने कहा कि चीन की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य टुकड़ी का गठन किया गया है, जो गतिरोध वाली जगह से बहुत दूर नहीं है।यह भी देखा गया कि चीन द्वारा पैंगोंग झील में गश्त बढ़ाई जा रही है। उन्होंने नावों की संख्या भी बढ़ा दी है।

क्षेत्र में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से दोनों देश आमने-सामने
भारतीय की ओर से क्षेत्र में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से दोनों देश आमने-सामने आ गए हैं। भारत की ओर से किए जा रहे निर्माण से चीन को आपत्ति है। हालांकि भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया है कि पैंगोंग झील पर कोई निरंतर तौर पर आमना-सामना नहीं हो रहा है और क्षेत्र में सशस्त्र सैनिकों की तैनाती नहीं की गई है। शुक्रवार को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने लद्दाख में 14 कोर मुख्यालय, लेह का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने एलएसी पर सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर समीक्षा भी की थी।

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