दैनिक भास्कर हिंदी: बीजेपी की सामान्य ज्ञान किताब से गायब हुआ गांधी परिवार

September 8th, 2017

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। बीजेपी इन दिनों पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष के तहत पूरे देशभर में कई तरह के कार्यक्रम चला रही है। बीजेपी ने कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में इसके तहत समारोहों का आयोजन करने के लिए एक समिति का गठन भी किया था। इसी समिति के द्वारा हाल ही में एक 'सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता' का आयोजन कराया गया। इसके लिए 'सामान्य ज्ञान 2017' नामक एक पुस्तक का प्रकाशन भी किया गया, जो कि लाखों की संख्या में सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में बांटी गई। मगर गौर करने वाली बात यह है की इस सामान्य ज्ञान की पुस्तक से गांधी परिवार के किसी भी सदस्य का नाम शामिल नहीं किया गया है। 

70 पेजों की इस पुस्तक में 34 चैप्टर हैं। इसके पहले चैप्टर में भारत के प्रथम राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, गवर्नर जनरल, लोकसभा अध्यक्ष, आदि के नाम बताए गए हैं। लेकिन इसमें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम नदारद है। साथ ही भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति के रूप में इंदिरा गांधी का भी नाम इस पुस्तक में कहीं भी प्रकाशित नहीं किया गया है। इसी पुस्तक के सातवें चैप्टर में भारत के महापुरुषों की सूची से महात्मा गांधी के नाम को भी गायब कर दिया गया है। इस सूची में स्वामी विवेकानंद, भीमराव अंबेडकर, गुरु गोविंद सिंह, बिरसा मुंडा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नानाजी देशमुख, मदनमोहन मालवीय, डॉ हेडगेवार, वीर सावरकर, कबीर दास, पटेल और लक्ष्मीबाई जैसे तमाम महापुरुषों का जिक्र किया गया है मगर कहीं पर भी महात्मा गांधी के नाम को राष्ट्रपिता के रूप में नहीं दर्शाया गया है।

पुस्तक के पेज नम्बर 41 पर आर्थिक परिदृश्य शीर्षक के अंतर्गत आरएसएस के संगठन भारतीय मजदूर संघ को भारत का सबसे बड़ा मजदूर संगठन बताया गया है। इस पुस्तक में मेक इन इंडिया के नारे को मोदी द्वार दिए गए नारे के रूप में शामिल किया है। यहां पर भी नेहरु द्वार दिए गए किसी भी नारे को शामिल नहीं किया गया है। पुस्तक में संविधान की जानकारी देते हुए बताया गया है कि किन देशों के संविधान से चीजों को उठाकर हमारे संविधान में शामिल किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि भारत का संविधान में विधि निर्माण की प्रक्रिया को ब्रिटेन के संविधान के जैसा रखा गया है, जिसे पढ़कर कहीं न कहीं यही लगता है कि भारतीय संविधान पर विदेशी प्रभाव ज्यादा है।