comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

गुजरात कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, राज्यसभा चुनाव से पहले 2 और विधायकों का इस्तीफा

June 04th, 2020 20:01 IST
 गुजरात कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, राज्यसभा चुनाव से पहले 2 और विधायकों का इस्तीफा

हाईलाइट

  • गुजरात कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, राज्यसभा चुनाव से पहले 2 और विधायकों का इस्तीफा

नई दिल्ली/अहमदाबाद, 4 जून (आईएएनएस)। गुजरात की राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को एक तगड़ा झटका लगा है। गुजरात कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाते हुए पार्टी के दो विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है।

उनके अपने पद से त्यागपत्र देने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या विधानसभा में और कम हो गई है। पार्टी के लिए अब राज्यसभा की दूसरी सीट जीतना मुश्किल भरा होगा।

जिन दो विधायकों ने इस्तीफा दिया, वे करजन से अक्षय पटेल और कपराडा सीट से जीतू चौधरी हैं।

गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा, दोनों कांग्रेस विधायक कल (बुधवार) शाम त्यागपत्र के साथ मेरे पास आए। मैंने उनका सत्यापन किया। उन्होंने मास्क (कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर) लगाए थे। मैंने उन्हें उसे हटाने के लिए कहा और उनके चेहरों की पहचान करने के बाद फिर उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए। वे अब सदन के सदस्य नहीं हैं।

कांग्रेस ने दो उम्मीदवारों- शक्ति सिंह गोहिल और भरत सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा है। गोहिल को पहली वरीयता का वोट मिलेगा और उनका राज्यसभा के लिए निर्वाचित होना निश्चित है, लेकिन भरत सिंह सोलंकी का भविष्य अधर में लटका है। अब केवल प्रबंधन कौशल ही उन्हें निर्वाचित कर सकता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोडवाडिया ने आईएएनएस से कहा, भाजपा हमारे विधायकों को लुभाने के लिए पैसे के साथ ही धमकी का इस्तेमाल कर रही है। अक्षय पटेल की खनन में व्यावसायिक हित हैं और इसलिए उन्हें लालच दिया गया है।

कांग्रेस ने पहले राजीव शुक्ला को नामित किया था लेकिन राज्य इकाई के विरोध के बाद पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री भरत सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा है।

पार्टी के एक नेता ने कहा, कांग्रेस को दोनों सीटों पर जीत के लिए जरूरी 71 वोटों की जरूरत है, लेकिन अब ताजा इस्तीफे के बाद संख्या कम हो गई है, जबकि भाजपा को अपने तीन उम्मीदवारों के लिए 106 वोटों की जरूरत है और वर्तमान में इसकी संख्या विधानसभा में 103 है। भाजपा ने तीसरी सीट जीतने के लिए कांग्रेस को फंसाया है।

कमेंट करें
QtgX9
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।