दैनिक भास्कर हिंदी: अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो अयोध्या में राम मंदिर बनाएगी : हरीश रावत

February 24th, 2019

हाईलाइट

  • राम मंदिर को लेकर कांग्रेस महासचिव हरीश रावत का बयान।
  • अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो अयोध्या में राम मंदिर बनाने की कोशिश करेगी।
  • रावत ने आरोप लगाया है कि बीजेपी मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रही है।

डिजिटल डेस्क, देहरादून। कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आई तो वह अयोध्या में राम मंदिर बनाने का भरसक प्रयास करेगी। रावत ने बीजेपी पर राम मंदिर के मुद्दे को लेकर राजनीति करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सिर्फ नरेंद्र मोदी को ही राष्ट्रवादी मानती है। 


राम मंदिर मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही बीजेपी- रावत

देहरादून में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरीश रावत ने कहा, अगर हमारी पार्टी सत्ता में आती है तो हम अयोध्या में राम मंदिर बनाने की कोशिश करेंगे। मेरे इस दृष्टिकोण को पार्टी का भी माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, सिर्फ कांग्रेस पार्टी ने ही पूर्व में सत्ता में रहने के दौरान दो बार राम मंदिर बनाने के प्रयास किए हैं और यह बात बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने भी उनके सामने स्वीकार की थी। रावत ने बीजेपी पर इस मुददे को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा केंद्र को इस संबंध में एक Facilitator की भूमिका निभानी चाहिए। 


सिर्फ पीएम ही नहीं देश का हर व्यक्ति राष्ट्रवादी है- रावत

पुलवामा हमले पर भी उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा। रावत ने कहा, केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही राष्ट्रवादी क्यों माना जा रहा है। भारत का हर एक व्यक्ति राष्ट्रवादी है। मैं भी राष्ट्रवादी हूं और आप भी राष्ट्रवादी हैं। सैनिकों की शहादत पर पूरा देश एक साथ खड़ा है। 


उत्तराखंड सरकार का बजट निराशाजनक

वहीं उत्तराखंड सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को रावत ने निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा, बजट में कुछ भी नया नहीं है और अगर कुछ है तो वह कुछ दीनदयाल उपाध्याय, कुछ नरेंद्र मोदी और कुछ पुराने प्रस्ताव हैं। रावत ने कहा इसमें गैर सरकारी संस्थाओं को पुनर्जीवित करने की उनकी सरकार की योजना को नाम बदल कर शामिल किया गया है। उन्होंने कहा उनकी सरकार ने इस योजना के लिए एक रिवॉल्विंग फंड भी तैयार किया था और उसमें पांच लाख रुपये रखे थे। इसी योजना का नाम बदल कर सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय योजना कर दिया है।