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हरियाणा : विहिप की शिकायत पर मुख्यमंत्री खट्टर पहुंचे मेवात

June 16th, 2020 18:30 IST
 हरियाणा : विहिप की शिकायत पर मुख्यमंत्री खट्टर पहुंचे मेवात

हाईलाइट

  • हरियाणा : विहिप की शिकायत पर मुख्यमंत्री खट्टर पहुंचे मेवात

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। हरियाणा के मेवात में दलित उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन की घटनाओं को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा लगातार शिकायत के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मंगलवार को मेवात पहुंचे। उन्होंने हालात की समीक्षा की और पीड़ित हिंदू परिवार व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की।

विहिप मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद सरकार द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज है। सूत्रों के मुताबिक, विहिप की खट्टर सरकार से नाराजगी इस कदर है कि मुख्यमंत्री के मेवात दौरे के दौरान उनसे मिलने विहिप का कोई भी आला अधिकारी नहीं गया।

वीहिप के महासचिव सुरेंद्र जैन ने आईएएनएस से कहा, हम मुख्यमंत्री के मेवात दौरे का स्वागत करते हैं, लेकिन चाहते हैं कि हरियाणा सरकार मेवात में हुई घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कारवाई करे। यहां के हिंदुओं को राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए मेवात में सीआरपीएफ या बीएसएफ की ट्रेंनिग सेंटर स्थापित किया जाए।

उन्होंने कहा, हम पिछले कई महीनों से सरकार के सामने अपनी आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन खट्टर सरकार को उनकी ब्यूरोक्रेसी खबर ही नहीं देती है। आज जनता का दबाव काम आया है और मुख्यमंत्री खुद मौके का निरीक्षण करने आए, उम्मीद करता हूं कि समस्याओं का हल निकलेगा।

उधर, भाजपा के महासचिव और हरियाणा प्रभारी अनिल जैन ने कहा कि यह मुद्दा पृरी तरह से आंतरिक मामला है। सरकार की इस पर नजर है। मुख्यमंत्री खुद गए। ध्यान रखा जाएगा कि किसी तरह की तुष्टीकरण न हो, सबको न्याय मिलेगा।

वहीं, विहिप कैम्प में यह चर्चा आम है कि कम से कम खट्टर सरकार से तो इस मसले पर इतनी उदासीनता की अपेक्षा नहीं थी। विहिप नेताओं का मानना है कि मई में संगठन के प्रतिनिधिमंडल के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट करने के बाद भी राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच की दिशा में न कदम उठाया और न ही आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई की। इससे ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इस गंभीर मसले पर उदासीन है।

गौरतलब है कि नई दिल्ली से करीब सौ किलोमीटर दूर हरियाणा में मेवात जिला है। वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने गुरुग्राम और फरीदाबाद के कुछ हिस्सों को काटकर मेवात जिले का गठन किया था। लेकिन 2016 में खट्टर सरकार ने जिले का नाम बदलकर नूंह कर दिया था। हरियाणा के दक्षिणी हिस्से में स्थित यह जिला पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है। विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार से जुड़े संगठन इस इलाके में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन और दलित उत्पीड़न होने की बात करते रहे हैं। मेवात सदियों से मुस्लिम बहुल क्षेत्र रहा है। विहिप का दावा है कि मेवात के 500 गांवों में से 103 गांव हिंदू विहीन हो चुके हैं।

पिछले महीने विहिप ने मुख्यमंत्री खट्टर से मुलाकात कर एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मेवात के कुल 500 गांवों में से 103 गांवों के हिंदू विहीन होने और 84 गांवों में चार से कम हिंदू परिवार होने की बात कही थी। विहिप नेताओं के मुताबिक, उस वक्त मुख्यमंत्री ने जांच कराने का आश्वसान दिया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

विहिप का आरोप है कि एक साजिश के तहत बहुसंख्यकों को अल्पसंख्यक बना दिया गया है। मेवात में देश विरोधी गतिविधियां चल रही हैं और रोहिंग्याओं का अड्डा बन चुका है।

सन् 1947 में देश विभाजन के बाद पलायन रोकने के लिए महात्मा गांधी और सीमांत गांधी कहलाने वाले अब्दुल गफ्फार खां मुस्लिम बहुल क्षेत्र मेवात आए थे। उन्होंने मुस्लिमों से कहा था कि वे अपने पुश्तैनी घर और पुरखों की कब्रें छोड़कर पाकिस्तान न जाएं, भारत की नई सरकार उन्हें खास सहूलियतें देगी। गांधी और सीमांत गांधी के आश्वासन पर मेवात से मुस्लिमों का पलायन रुका था। उस दौरान गांधी मेवात के घासेरा गांव में ठहरे थे, जिसका नाम बाद में गांधीग्राम रखा गया था। इस क्षेत्र में हिंदुओं के कम होने को विहिप बड़ा मुद्दा बनाने में जुटी हुई है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।