दैनिक भास्कर हिंदी: जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बन सकती हैं तो ममता या मायावती क्यों नहीं : देवगौड़ा

August 6th, 2018

हाईलाइट

  • एच डी देवगौड़ा ने कहा ममता बनर्जी बन सकती हैं प्रधानमंत्री पद का चेहरा।
  • पूर्व प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी की तारीफ की।
  • ममता सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं।

डिजिटल डेस्क, कर्नाटक। साल 2019 में होने वाले 17वें लोकसभा चुनाव के लिए सियासी बिसात जमना शुरू हो गई है। चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों द्वारा महा-गठबंधन बनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। हालांकि विपक्षी दलों के गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन पीएम पद के चेहरों को लेकर कई बयान सामने आने लगे हैं। इस सम्बंध में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल सेक्यूलर के अध्यक्ष एच डी देवगौड़ा ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगामी चुनाव में विपक्ष की पीएम उम्मीदवार हो सकती हैं।

देवगौड़ा ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बन सकती हैं तो ममता या मायावती क्यों नहीं। वह किसी महिला के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने 1996 में संसद में भी महिला आरक्षण विधेयक का सपोर्ट किया था। उन्होंने कहा, 'अगर ममता को प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है, तो उनका स्वागत है।'

पूर्व प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि ममता सभी गैर भाजपाई और क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की सराहनीय कोशिश कर रही हैं। वह भाजपा को सत्ता से हटाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सभी को ममता से सीख लेनी चाहिए। देवगौड़ा ने साथ ही इस बात का जिक्र भी किया कि जेडी(एस) ने फिलहाल क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने की कवायद शुरू नहीं की है पर वह भी जल्द ही इस काम में लग जाएंगे।

देवगौड़ा ने महागठबंधन बनाने के सवाल पर कहा कि देश में डर का माहौल है। उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात में अल्पसंख्यकों की स्थिति दयनीय है। इन सभी मुद्दों को सुलझाने और भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत मोर्चे की जरूरत है। वहीं कर्नाटक में 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीती पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उनकी पार्टी यह चुनाव साथ में लड़ेंगी।

बता दें कि देवगौड़ा 1996 में जनता दल की अगुवाई वाली यूनाइटेड फ्रंट (थर्ड फ्रंट) की तरफ से प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि उनका कार्यकाल एक साल का ही रहा और उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। उनके बाद इन्द्र कुमार गुजराल भारत के प्रधानमंत्री बने थे।