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जम्मू कश्मीर: 35-A पर सुनवाई 27 तक टली, विरोध में एक हुए अलगाववादी और राजनीतिक दल

September 08th, 2018 18:34 IST
जम्मू कश्मीर: 35-A पर सुनवाई 27 तक टली, विरोध में एक हुए अलगाववादी और राजनीतिक दल

हाईलाइट

  • सुनवाई के विरोध में रविवार को भी बंद रखा गया था।
  • दिल्ली के एनजीओ वी द सिटीजन ने दायर की है याचिका।
  • सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई का दूसरा दिन है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान के अनुच्छेद 35-A पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने 27 अगस्त तक टाल दिया है। सुनवाई का विरोध कर रहे कश्मीर के अलगाववादी और राजनीतिक दल अब एक होते नजर आ रहे हैं। अलगाववादी दल हुर्रियत के साथ पीडीपी,  नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस की जम्मू इकाई सहित माकपा भी बंद का समर्थन कर रही है। सुनवाई के विरोध में रविवार को भी बंद रखा गया था, जिसमें कश्मीर के लोंगों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने कुछ समय टालने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने इसका कारण वहां होने वाले आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव को बताया था। दिल्ली के एक एनजीओ वी द सिटीजन ने संविधान पीठ में अनुच्छेद 35-A पर सुनवाई की मांग की थी। इस संगठन की मांग पर ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। संगठन ने सुनवाई न टालने की मांग की थी।

बंद का असर, रोकी अमरनाथ यात्रा
अलगाववादी संगठनों ने रविवार और सोमवार को बंद बुलाया था। प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा को रोक दिया है। कश्मीर घाटी के किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिले में रविवार को बंद का काफी असर दिखा, इसलिए प्रशासन ने भगवती कैंप के बेस में यात्रियों को रोक दिया। श्रीनगर औऱ जम्मू हाईवे पर विशेष चेक पोस्ट भी बनाए गए हैं। यात्रा 26 अगस्त को समाप्त होगी। अब तक 2.11 लोग दर्शन कर चुके हैं।

ये है धारा 35-A में
धारा 35-A में स्थायी नागरिकता पारिभाषित की गई है। इसके मुताबिक स्थाई नागरिक वह है, जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक हो या इससे पहले 10 वर्षों से यहां रह रहा हो। बता दें कि 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आदेश पारित कर भारत के संविधान में नया अनुच्छेद 35A जोड़ा था। कानून के मुताबिक यहां की महिला की अगर राज्य के बाहर शादी करती है तो उसके और उसके बच्चों को जम्मू कश्मीर का नागरिक नहीं माना जाता।

 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।