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मणिपुर संकट का हल ढूंढने के लिए अमित शाह से मिलने पहुंचे हेमंत बिस्वा और मेघालय के सीएम

June 24th, 2020 20:00 IST
 मणिपुर संकट का हल ढूंढने के लिए अमित शाह से मिलने पहुंचे हेमंत बिस्वा और मेघालय के सीएम

हाईलाइट

  • मणिपुर संकट का हल ढूंढने के लिए अमित शाह से मिलने पहुंचे हेमंत बिस्वा और मेघालय के सीएम

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। मणिपुर में नाराज होकर बीजेपी सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सहयोगी दल एनपीपी के चार विधायकों के मसले को सुलझाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह जुट गए हैं। गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर बुधवार की शाम असम के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की फिलहाल बैठक चल रही है। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में असंतुष्ट विधायक भी शामिल हैं।

बता दें कि बीते 17 जून को राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले मणिपुर में भाजपा के 3 विधायकों ने इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वहीं सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी के चारों मंत्रियों ने भी नाराजगी के कारण इस्तीफा देते हुए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। तृणमूल के एक और निर्दल एक विधायक भी बीरेन सिंह सरकार से अलग हो गए थे। कुल नौ विधायकों के बगावत के बाद बीरेन सिंह सरकार पर संकट मंडराने लगा। हालांकि 19 जून को हुए राज्यसभा चुनाव की एक सीट बीजेपी जीतने में सफल रही थी। बीजेपी उम्मीदवार को 28 वोट हासिल हुए थे। जिससे बीजेपी को लगा कि वह इस मुद्दे को सुलझा सकती है।

गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भरोसेमंद असम के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा को मोर्चे पर लगाया। हेमंत बिस्वा शर्मा ने एनपीपी के असंतुष्ट चारों विधायकों से बात करते हुए उन्हें मनाने की कोशिश की। 23 जून को हेमंत बिस्वा शर्मा इंफाल पहुंचे थे। इस दौरान वह विधायकों को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के लिए राजी करने में सफल रहे। चूंकि मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा, एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ऐसे में वह भी अपने विधायकों को मनाने में जुटे रहे। एक रणनीति के तहत दोनों नेता चारों असंतुष्ट विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचे। बुधवार की शाम साढ़े छह बजे वह गृहमंत्री अमित शाह के आवास पर पहुंचे।

सूत्रों का कहना है कि एनपीपी के चारों विधायक मुख्यमंत्री पद से एन बीरेन सिंह को हटाने की मांग पर अड़े हैं। इस मुद्दे पर भाजपा मानने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश चल रही है। गृहमंत्री अमित शाह की इस बैठक में मेघालय के संकट का हल खोजा जाएगा। सूत्र बता रहे हैं कि एनपीपी के विधायक भाजपा की सरकार को समर्थन देने के लिए लगभग राजी हो गए हैं। अगर एनपीपी के विधायक फिर से मंत्री बनते हैं तो उनकी भूमिका पहले से प्रभावी होगी। क्योंकि उपेक्षा के कारण ही उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।