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केरल में बाढ़ से 8316 करोड़ का नुकसान, 20 हजार घर तबाह, 10 हजार KM सड़कें बर्बाद

August 13th, 2018 15:01 IST
केरल में बाढ़ से 8316 करोड़ का नुकसान, 20 हजार घर तबाह, 10 हजार KM सड़कें बर्बाद

हाईलाइट

  • केरल में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • इस बीच रविवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रभावित इलाको का हवाई सर्वेक्षण किया।
  • गृहमंत्री ने एर्नाकुलम और वायनाड जिले के राहत शिविरों में जाकर लोगों से भी मुलाकात की।

डिजिटल डेस्क, तिरुवनंतपुरम। केरल में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच रविवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रभावित इलाको का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके साथ ही गृहमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के.जे. अल्फोंस और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एर्नाकुलम और वायनाड जिले के राहत शिविरों में जाकर लोगों से मुलाकात की। केरल के सीएम पी विजयन ने कहा कि शुरुआती आंकलन के मुताबिक बाढ़ से 8316 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। करीब 20 हजार घर पूरी तरह से तबाह हो गए है और लगभग 10 हजार किलोमीटर की सड़क बर्बाद हो गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से तात्कालिक राहत और पुनर्वास के लिए 820 करोड़ रुपये के अतिरिक्त और 400 करोड़ रुपये की मांग की गई है। 


राजनाथ सिंह ने कहा कि बाढ़ आने के बाद केरल राज्य की हालात काफी गंभीर है। मैं राज्य सरकार को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी संसाधन केंद्र सरकार से उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र इस महत्वपूर्ण समय पर केरल राज्य की जरूरतों के प्रति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा, 2018-19 के लिए SDRF के केंद्रीय हिस्से के 80.25 करोड़ रुपये की पहली किस्त पिछले महीने जारी की गई थी। अब 80.25 करोड़ रुपए की SDRF की दूसरी किश्त भी एडवांस में जारी कर दी गई है। राजनाथ सिंह ने कहा अचानक आए इस संकट के कारण केरल के लोगों की पीड़ा को मैं समझता हूं। चूंकि नुकसान के आकलन में कुछ समय लगेगा, इसलिए मैं अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये की तत्काल राहत की घोषणा करता हूं।


उधर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि केरल में आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। हमने फैसला लिया है कि जैसे ही स्थिति सामान्य हो जाती है, बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए पासपोर्ट को बिना किसी चार्ज के बदला जाएगा। उन्होंने प्रभावितों को संबंधित पासपोर्ट केंद्रों से संपर्क करने के लिए कहा।


इससे पहले शनिवार को राज्य के सीएम पी.विजयन ने बाढ़ ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के बाद सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, 'केरल भयंकर बाढ़ से गुजर रहा है और आपदा के कारण काफी नुकसान हुआ है। अपने घरों और भूमि को खोनेवाले लोगों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और अपने परिवार के सदस्य को गंवाने वालों को चार लाख रुपये दिए जाएंगे।'

राज्य के ऊर्जा मंत्री एम.एम. मणि ने कहा, "बीती रात से इडुक्की बांध और उसके आसपास बारिश कम हुई है, जिसके कारण बांध का जलस्तर भी कम हो गया है। अभी तक चीजें ठीक रही हैं और सबकुछ योजना के मुताबिक हो रहा है। बाढ़ द्वार के समीप पहुंचे पानी को चेरुथोनी पर रोक लिया गया, जिससे कोई बड़ा संकट खड़ा नहीं हुआ।"

बता दें कि केरल के इडुक्की बांध में रविवार को जलस्तर में गिरावट आई है। बांध का जलस्तर अभी 2,399.28 फीट है। हालांकि एनार्कुलम और त्रिशूर जिलों के कई हिस्से अभी भी जलमग्न हैं। भारतीय सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान राज्य के कन्नूर, वायनाड, इडुक्की, मल्लपुरम और कोझिकोड के इलाकों में हुआ है।  

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।