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Virus: भारत को ICMR की चेतावनी, भारत में कोहराम मचा सकता है एक और चाइनीज वायरस

Virus: भारत को ICMR की चेतावनी, भारत में कोहराम मचा सकता है एक और चाइनीज वायरस

हाईलाइट

  • इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में जुलाई में छपी स्टडी से खुलासा
  • कर्नाटक से लिए गए 2 सीरम सैंपलों में मिले कैट क्यू वायरस के प्रति ऐंटीबॉडीज
  • कैट क्यू वायरस मुख्य तौर पर क्यूलेक्स मच्छरों और सुअरों से फैलते हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी से भारत समेत पूरी दुनिया बुरी तरह प्रभावित हैं और इस पर नियंत्रण पाने के लिए वैक्सीन बनाने की जद्दोजहद में जुटे हुए। इसी बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने चीन से कनेक्शन वाले एक और वायरस को लेकर चेतावनी जारी की है। भारत में दो सीरम सैंपलों के भीतर कैट क्यू वायरस के प्रति ऐंटीबॉडी मिल चुके हैं, जिसका मतलब है कि संबंधित व्यक्ति शायद संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं। इंग्लिश न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस साल जुलाई में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में छपी स्टडी में वैज्ञानिकों ने बताया है कि 2 ह्यूमन सीरम सैंपल में कैट क्यू वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज की मौजूदगी मिली है।

ICMR ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि चीन का कैट क्यू वायरस (Cat Que Virus यानी CQV) भारत में दस्तक दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह इंसानों में ज्वर संबंधी बीमारी, मेनिनजाइटिस और बच्चों में इंसेफलाइटिस की समस्या पैदा करेगा।

कैट क्यू वायरस की मौजूदगी का मिला प्रमाण
ICMR के पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी के सात शोधकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि चीन और वियतनाम में कैट क्यू वायरस की मौजूदगी का पता चला है। वहां क्यूलेक्स मच्छरों और सूअरों में यह वायरस मिला है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत में भी क्यूलेक्स मच्छरों में कैट क्यू वायरस जैसा ही कुछ मिला है। ICMR ने कहा कि CQV मूल रूप से सूअर में ही पाया जाता है और चीन के पालतू सूअरों में इस वायरस के खिलाफ पनपी ऐंटीबॉडीज पाया गया है। इससे साफ है कि कैट क्यू वायरस ने चीन में स्थानीय स्तर पर अपना प्रकोप फैलाना शुरू कर दिया है।

883 सैंपल में दो पॉजिटिव पाए गए
वैज्ञानिकों ने विभिन्न राज्यों में 883 लोगों से सैंपल लिए और दो में वायरस के खिलाफ एंटी बॉडीज पाए गए। जांच में पता चला कि दोनों लोग एक ही वक्त वायरस से संक्रमित हुए थे। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में जून महीने में प्रकाशित एक रिसर्च में कहा गया है कि इंसानों के सीरम सैंपलों की जांच में Anti-CQV आईजीजी ऐंटीबॉडी का पाया जाना और मच्छरों में CQV का रेप्लकेशन कपैबिलिटी से पता चलता है कि भारत में यह बीमारी फैलाने की क्षमता रखता है। ऐसे में इंसानों और सूअरों के और सीरम सैंपलों की जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि कहीं यह वायरस हमारे बीच पहले से ही मौजूद तो नहीं है।

एक वैज्ञानिक ने कहा कि भारत के संदर्भ में आंकड़े बताते हैं कि कुछ मच्छर CQV के लेकर संवेदनशील हैं। इस तरह मच्छर CQV के संक्रमण का कारक बन सकते हैं।

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