दैनिक भास्कर हिंदी: Defense: भारतीय नौसेना अपनी ताकत बढ़ाने के लिए खरीदेगी 38 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें, 1800 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा

December 16th, 2020

हाईलाइट

  • 36 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें खरीदी जाएंगी
  • 1800 करोड़ रुपए का एक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने 38 अधिक रेंज की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद का प्रस्ताव दिया है। ये मिसाइलें लगभग 450 किलोमीटर की दूरी से भी सटीक निशाना साथ सकेंगीं। ये मिसाइलें विशाखापत्तनम क्लास युद्धपोत पर लगाई जाएंगी, जो जल्द की नौसेना की सक्रिय सेवा में शामिल होगा।

18 सौ करोड़ का बनाया प्रस्ताव
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सरकारी सूत्रों ने इस संबंध में कहा कि अधिक रेंज की 36 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खरीद के लिए 1800 करोड़ रुपए का एक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को दिया गया है। इस प्रस्ताव को जल्द ही अनुमति मिलने की उम्मीद है। यह खरीद होने के बाद नौसेना की शक्तियों व युद्धक क्षमताओं में और बढ़ोतरी होगी। समुद्री इलाकों में 400 किमी से ज्यादा दूरी तक टारगेट को निशाना बनाने की क्षमता जांचने के लिए भारतीय नौसेना ने अपने वारशिप INS चेन्नई से ब्रह्मोस मिसाइल की टेस्ट फायरिंग भी की थी।

बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल नौसेना के युद्धपोतों का प्रमुख हथियार होगी और इसे पहले ही कई युद्धपोतों पर लगाया जा चुका है। भारतीय नौसेना ने गहरे समुद्र में 400 किलोमीटर से अधिक दूरी पर निशानों को ध्वस्त करने की इस मिसाइल की क्षमता प्रदर्शित करने के लिए अपने युद्धपोत आईएनएस चेन्नई से ब्रह्मोस मिसाइल के कई सफल परीक्षण किए था।

एक्सपोर्ट मार्केट भी खोजा जा रहा
भारत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए एक्सपोर्ट मार्केट खोजने पर भी काम कर रहा है, जिसे डीआरडीओ ने अपने प्रोजेक्ट PJ-10 के तहत काफी हद तक स्वदेशी बना दिया है। 90 के दशक के अंत में भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर के बाद ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तीनों सशस्त्र बलों के लिए एक ताकतवर हथियार बन चुकी है, जिसका उपयोग सेनाएं हालात के मुताबिक करती हैं।

सोमवार को 'INS हिमगिरि' लॉन्च किया गया था
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कोलकाता में सोमवार को फ्रिगेट वॉरशिप 'INS हिमगिरि' को लॉन्च किया था। इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) यार्ड पर प्रोजेक्ट 17-A के तहत तैयार किया गया है। प्रोजेक्ट 17-A के तहत बनाए जा रहे फ्रिगेट वारशिप की खासियत है कि यह दुश्मन के रडार में नहीं आ सकता। GRSE के इस प्रोजेक्ट से भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत 3 वॉरशिप तैयार किए जाएंगे। दूसरा और तीसरा वॉरशिप साल 2024 और 2025 में मिलने की उम्मीद है।

खबरें और भी हैं...