दैनिक भास्कर हिंदी: ISRO ने किया वायुसेना के साथ MOU साइन, गगनयान मिशन में देगी मदद

May 29th, 2019

हाईलाइट

  • भारतीय वायुसेना के साथ ISRO ने गगनयान मिशन के लिए MOU साइन किया है
  • वायुसेना इस मिशन में ISRO की चालक दल का चयन करने और ट्रेनिंग देने में मदद करेगी
  • गगनयान मिशन के तहत ISRO 2022 में एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में भेजेगा

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। भारतीय वायुसेना के साथ ISRO ने गगनयान मिशन के लिए MOU साइन किया है। वायुसेना इस मिशन में ISRO के चालक दल का चयन करने और ट्रेनिंग देने में मदद करेगी। एयर वाइस मार्शल आरजीके कपूर, एसीएएस ऑप्स (स्पेस) ने गगनयान प्रोगाम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर हटन को MOU सौंपा। बता दें कि 2022 में भारत अंतरिक्ष में पहली बार अपने एस्ट्रोनॉट्स को भेजेगा इस मिशन को गगनयान नाम दिया गया है।

ISRO के चेयरमैन के. सिवन ने कहा कि MOU साइन होने के बाद अब चालक दल के चयन की प्रक्रिया में करीब 12-14 महीने का समय लगेगा, जिसके बाद ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। भारत में अधिकांश ट्रेनिंग बुनियादी होगी। ISRO एडवांस्ड ट्रेनिंग के लिए विदेशी मदद लेगा।

भारतीय वायुसेना की ओर से, एयरोस्पेस मेडिसिन संस्थान (IAM) अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण का नेतृत्व करेगा। IAM कमांडेंट एयर कमोडोर अनुपम अग्रवाल ने कहा, 'हमें 30 उम्मीदवारों के एक पूल की आवश्यकता होगी, जिनमें से 15 को चुना जाएगा और उन्हें बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा, यदि ISRO इस मिशन में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना बनाता है तो हम तीन-तीन एस्ट्रोनॉट के तीन सेटों को शॉर्टलिस्ट करेंगे और एक सेट को लॉन्च से तीन महीने पहले फाइनल कर देंगे जबकि बाकि एस्ट्रोनॉट्स को लॉन्च के दिन तक हम साथ रखेंगे।

अग्रवाल ने कहा कि मूल्यांकन के पहले सेट में लगभग तीन महीने लगेंगे क्योंकि IAM को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सबसे अच्छा है। इनकी शारीरिक स्थिति भारत में सबसे अच्छी है और उनमें सही मानसिक क्षमता भी है।

इसरो ने फरवरी में इससे जुड़े सभी दस्तावेज भारतीय वायुसेना को सौंपे थे। IAM के एक सूत्र ने कहा, 'हम आगे बढ़ने से पहले आधिकारिक एमओयू की प्रतीक्षा कर रहे थे।' जबकि सिवन ने कहा, 'वे MOU के बिना आगे बढ़ सकते थे क्योंकि हमने सभी दस्तावेज उन्हें सौंप दिए थे। MOU केवल एक औपचारिकता भर थी।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को गगनयान मिशन की घोषणा की थी। केंद्र ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर में 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए थे और इसरो ने 30 जनवरी को बेंगलुरु में अपने मुख्यालय में ह्यूमन स्पेसफ्लाइट सेंटर की स्थापना की थी।