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जिंदल इंस्टीट्यूट ने स्प्रिंगर नेचर सिंगापुर संग किया समझौता

June 22nd, 2020 15:30 IST
 जिंदल इंस्टीट्यूट ने स्प्रिंगर नेचर सिंगापुर संग किया समझौता

हाईलाइट

  • जिंदल इंस्टीट्यूट ने स्प्रिंगर नेचर सिंगापुर संग किया समझौता

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। हरियाणा के सोनीपत स्थित ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियोरल साइंसेज ने सोमवार को वैश्विक अकादमिक प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर ग्रुप सिंगापुर के साथ पुस्तकों के सह-प्रकाशन, मोनोग्राफ और पुस्तकों के संपादन के सहयोग के लिए एक समझौते की घोषणा की।

इस समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष व्यवहार विज्ञान (बिहेवियरल साइंसेज) में सह-प्रकाशन कार्य के लिए अवसर तलाशेंगे, लेकिन यह संस्थान द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों के व्यक्तिगत शीर्षक, श्रंखला के शीर्षक (सीरीज टाइटल) और पुस्तकों के नए संस्करणों तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि इसमें अन्य कार्य भी शामिल होंगे, जो इन श्रेणियों में नहीं आते हैं।

संस्थान इस समझौते के तहत स्प्रिंगर द्वारा प्रकाशित कार्यों के कॉपीराइट का अनन्य स्वामी (एक्सक्लूसिव ऑनर) भी बना रहेगा।

बदले में, स्प्रिंगर नेचर के पास पूरे विश्व में जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियोरल साइंसेज (जेआईबीएस) के सह-प्रकाशनों को बेचने और वितरित करने के लिए विशेष अधिकार होंगे।

जेआईबीएस के प्रमुख निदेशक प्रोफेसर संजीव पी. साहनी ने कहा कि यह सहयोग संस्थान के युवा शोधकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक आदान-प्रदान में शामिल होने और उनके शोध को प्रकाशित करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा। साहनी ने जेआईबीएस की ओर से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

जेआईबीएस ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य अंतराष्र्ट्ीय स्तर पर एक अग्रणी शोध संस्थान बनने के लिए अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए वैश्विक अकादमिक और अनुसंधान उत्कृष्टता हासिल करना है।

साहनी ने कहा, स्प्रिंगर नेचर द्वारा उपलब्ध कराए गए मजबूत और बहुस्तरीय नेटवर्क की मदद से हमारे संस्थान में हमारे द्वारा उत्पादित गुणवत्ता अनुसंधान के व्यापक प्रसार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्प्रिंगर 175 वर्ष से चल रहे प्रसिद्ध वैश्विक प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर का हिस्सा है, जो शोध के क्षेत्र में कार्य करता है और उसका समर्थन करता है।

इस समझौते से दोनों पक्षों द्वारा आपसी हित के विषयों पर आयोजित किए जाने वाले संयुक्त कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों का मार्ग भी प्रशस्त होगा, जिसमें अकादमिक लेखन, शिक्षा और अन्य अनुसंधान उन्मुख गतिविधियां शामिल हैं।

22 अप्रैल, 2014 को स्थापित, जेआईबीएस ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी का एक मूल्य-आधारित अनुसंधान संस्थान है। यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली (एसीयूएनएस) पर अकादमिक परिषद का सदस्य है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।