दैनिक भास्कर हिंदी: वरिष्ठता सूची में तीसरे नंबर पर जस्टिस जोसेफ का नाम, सुप्रीम कोर्ट के जज नाराज

September 8th, 2018

हाईलाइट

  • सीजेआई दीपक मिश्रा से मुलाकात करेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज।
  • जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरण का नाम पहले रखा गया है।
  • शुक्रवार को तीनों जस्टिस की नियुक्ति स्वीकृत की गई थी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वरिष्ठता सूची में जस्टिस केएम जोसेफ का नाम तीसरे नंबर पर रखने से नया विवाद खड़ा हो गया है। जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता घटाने पर नाराज सुप्रीम कोर्ट के कुछ जज आज (सोमवार) चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) मुलाकात कर सकते हैं। बता दें कि तीन चीफ जस्टिस के सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दी थी। सरकार ने इसके बाद अधिसूचना जारी की, जिसमें जस्टिस केएम जोसेफ का नाम तीसरे नंबर पर रखा गया है। सूची में जस्टिस जोसेफ के पहले मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और ओडिशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विनीत सरण का नाम रखा गया है। मंगलवार को तीनों जजों का शपथ ग्रहण समारोह भी होना है।

नाम वापस भेजने पर हो चुका है विवाद
चीफ जस्टिस केएम जोसेफ से जुड़ा एक और विवाद पहले सामने आ चुका है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने केंद्र सरकार के पास जस्टिस केएम जोसेफ का नाम भेजा था। केंद्र ने यह कहकर नाम वापस कर दिया था कि जस्टिस जोसेफ उतने सीनियर नहीं है। ओडिशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विनीत सरण और मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी के साथ कॉलेजियम ने दोबारा जस्टिस जोसेफ का नाम सरकार के पास भेजा था। दूसरी बार नाम भेजने पर सरकार स्वीकर करने के लिए बाध्य होती है। सरकार ने शुक्रवार को तीनों जजों की नियुक्ति को स्वीकृत कर दिया था।

क्या फर्क पड़ेगा?
सुप्रीम कोर्ट में जज बनने वालों को पहले वरिष्ठ जज का सहयोगी बनकर दो जजों की बेंच में बैठना होता है। बेंच की अध्यक्षता को मौका उन्हें कुछ साल बाद मिलता है। सूची में नाम पीछे होने के कारण जस्टिस जोसेफ को इंदिरा बनर्जी और वनीत सरण के बाद ये मौका मिलेगा। माना जा रहा है कि सरकार ने जानबूझकर उनके नाम को नीचे रखा है।

कांग्रेस ने कहा, वरिष्ठता होगी प्रभावित
इस मसले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा, ‘ मोदी सरकार का तानाशाही भरा रवैया निंदनीय है। आम जनता की आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से है, जिसे मोदी सरकार प्रभावित करना चाहती है। सुरजेवाला ने लिखा अब वरिष्ठता क्या राजनीतिक पसंद के आधार पर तय की जाएगी। सरकार के एक निर्णय से वरिष्ठता पर प्रभाव पड़ेगा।