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मप्र में खाली सीटों की संख्या 27: कांग्रेस के एक और विधायक ने दिया इस्तीफा, 12 दिनों में 3 ने छोड़ा पार्टी का साथ  

मप्र में खाली सीटों की संख्या 27: कांग्रेस के एक और विधायक ने दिया इस्तीफा, 12 दिनों में 3 ने छोड़ा पार्टी का साथ  

हाईलाइट

  • अब 27 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव
  • दो सीटें विधायकों के निधन होने से खाली

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायकों का भाजपा में शामिल होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जो कांग्रेस के लिए सिर दर्द का कारण बन गया है। उपचुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के एक और विधायक ने आज (गुरुवार, 23 जुलाई) इस्तीफा दे दिया। खंडवा जिले की मांधाता विधानसभा से कांग्रेस विधायक नारायण पटेल ने प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को सौंप दिया। बता दें कि 12 दिन के अंदर पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले इससे पहले कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न लोधी और सावित्री देवी कासडेकर ने भी इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। सावित्री देवी के इस्तीफे के बाद परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा था कि अभी और विधायक कांग्रेस का साथ छोड़ेंगे। इसके साथ ही अब विधानसभा में खाली सीटों की संख्या 27 हो गई है।      

इस तरह कांग्रेस विधायकों ने छोड़ा पार्टी का साथ

  • 10 मार्च: को कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी का हाथ थाम लिया था और तत्कालीन कमलनाथ सरकार को अल्पमत में लाकर आखिरकार गिरा दिया था।
  • 12 जुलाई: कांग्रेस विधायक प्रद्युमन सिंह लोधी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए।
  • 17 जुलाई: बुरहानपुर जिले के नेपान गगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर ने लिखित में प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा सौंपा था। स्पीकर द्वारा उनका इस्तिफा स्वीकार करने के बाद वे भाजपा में शामिल हो गईं। भोपाल स्थित भाजपा कार्यालय पर ​मुख्यमंत्री शि​वराज सिंह चौहान ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलवाई थी।
  • 23 जुलाई: खंडवा जिले की मांधाता विधानसभा से कांग्रेस विधायक नारायण पटेल ने प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को सौंपा। 

अब 27 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव
बता दें कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए संकट की शुरुआत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की थी जो अपने 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। इसके अलावा दो विधायकों के निधन और अब तीन विधायकों की ओर से इस्तीफा दिए जाने के बाद 27 विधानसभा सीट खाली हो गई हैं, जिन पर उपचुनाव होंगे।

दो सीटें विधायकों के निधन होने से खाली
मुरैना जिले की जौरा सीट से कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा का 21 दिसंबर 2019 को निधन हो गया था। इसी साल 30 जनवरी को आगर-मालवा से भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल का भी बीमारी के कारण निधन हो गया।

विधानसभा में स्थिति

  • मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य हैं।
  • इनमें 22 पहले ही इस्तीफा दे चुके। 2 का निधन हो चुका।
  • 27 सीटें खाली होने से विधानसभा में कुल 203 सदस्य।
  • कांग्रेस के अब 89 विधायक हैं। 
  • भाजपा के पास 107 विधायक हैं। 
  • 4 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा का विधायक।
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।