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कोच्चि : चार वाटरफ्रंट हाईराइज अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स मलबे में तब्दील, देखें वीडियो


हाईलाइट

  • कोच्चि में चारों वाटरफ्रंट हाईराइज अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त कर दिया गया
  • रविवार को गोल्डन कायालोरम और जैन कोरल अपार्टमेंट को जमींदोज किया गया
  • शनिवार को होली फेथ H2O और अल्फा सेरीन अपार्टमेंट को गिराया गया था

डिजिटल डेस्क, कोच्चि। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कोच्चि में चारों वाटरफ्रंट हाईराइज अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स को ध्वस्त कर दिया गया। रविवार को गोल्डन कायालोरम और जैन कोरल अपार्टमेंट को जमींदोज किया गया तो वहीं शनिवार को होली फेथ H2O और अल्फा सेरीन अपार्टमेंट को गिराया गया था। तटीय नियमन क्षेत्र (CRZ) मानदंडों का उल्लंघन कर ये चारों अपार्टमेंट बनाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2019 में इन चारों अपार्टमेंट के 343 फ्लैटों को 138 दिनों के भीतर गिराने का आदेश दिया था।

6 सेकंड में दोनों इमारतें धराशाई
जैन कोरल कोव अपार्टमेंट को सुबह 11.03 बजे और गोल्डन कायालोरम को दोपहर 02.30 बजे धवस्त किया गया। ये दोनों इमारतें 6 सेकंड के अंदर धराशाई हो गई। जैन कोरल कोव चार इमारतों में से सबसे बड़ी थी जबकि गोल्डन कायालोरम सबसे छोटी। तीन इमारतों को दक्षिण अफ्रीका स्थित जेट डेमोलिशन की सहायता से एडिफ़िस इंजीनियरिंग ने जमींदोज किया। जबकि एक इमारत, अल्फा सेरेन को विजय स्टील्स एंड एक्सप्लोसिव ने गिराया। एक दशक से अधिक समय तक चली मुकदमेबाजी के बाद मराडू में चार अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्सों को सीआरजेड मानदंडों का उल्लंघन मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

पूरी तरह सफल रही योजना
इससे पहले शनिवार को भारी सुरक्षा के बीच 19 मंजिला पहली इमारत - होली फेथ H2O - को 11.18 बजे धमाके से ध्वस्त किया गया था। पहले इसे 11 बजे गिराया जाना था, लेकिन एरियल सर्विलांस समय पर पूरा नहीं होने के कारण इसमें 18 मिनट की देरी हुई। दूसरी इमारत - अल्फा सेरीन - को सुबह 11.43 बजे ढहाया गया। अल्फ़ा सेरीन 36 घरों से घिरी हुई थी। कोच्चि शहर के पुलिस कमिश्नर विजय सखारे ने कहा था कि 'इमारतों को धवस्त करने की योजना पूरी तरह से सफल रही। इसमें कोलेटरल डैमज लगभग शून्य रहा। किसी भी संपत्ति, मानव या पशु जीवन को इससे नुकसान नहीं हुआ।

जल और वायु क्षेत्र में लगाई गई थी धारा 144
इन इमारतों को गिराने से पहले आसपास के इलाके को खाली कराया गया था। इतना ही नहीं जल और वायु क्षेत्र में धारा 144 लगाई गई थी। जल क्षेत्र की निगरानी तटीय पुलिस की नौकाएं ने की। जमीन पर करीब 500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। वहीं भीड़ और यातायात को नियंत्रित करने के लिए 300 'स्ट्राइकर दल' मौजूद थे। इस दौरान किसी भी ड्रोन को वहां उड़ने की इजाजत नहीं दी गई।

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