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मप्र : डकैत बबुली कोल की पत्नी फिर विधवा, शादी के 10वें दिन चौथे पति की मौत

November 30th, 2019 18:00 IST
 मप्र : डकैत बबुली कोल की पत्नी फिर विधवा, शादी के 10वें दिन चौथे पति की मौत

हाईलाइट

  • मप्र : डकैत बबुली कोल की पत्नी फिर विधवा, शादी के 10वें दिन चौथे पति की मौत

रीवां (मप्र), 30 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए डकैत बबुली कोल की पत्नी गुड़िया की किस्मत को शायद विधवा की जिंदगी ही बदा है। नई शादी रचाने के 10वें दिन हृदयाघात के कारण शुक्रवार को 59 वर्षीय उसके चौथे पति की भी मौत हो गई।

रीवां पुलिस के अनुसार, मारे गए साढ़े पांच लाख रुपये के इनामी डकैत बबुली कोल की पत्नी गुड़िया देवी (32) ने रीवां जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र के डाढ़ गांव निवासी (हाल पता उपहटी मुहल्ला रीवां) व्यवसायी सुनील सिंह उर्फ अनिल (59) से 18 नवंबर को सिरमौर के शिव मंदिर में शादी रचाई थी। शुक्रवार को एक वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान छग चिरमिरी गांव में हृदयाघात के कारण व्यवसायी अनिल की मौत हो गई। गुड़िया की यह चौथी शादी थी।

मध्य प्रदेश के रीवां परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) चंचल शेखर ने शनिवार को कहा, हां, यह सही है कि गुड़िया के नए पति व्यवसायी सुनील उर्फ अनिल (59) की शुक्रवार को हर्ट अटैक से मौत होने की सूचना मिली है।

गौरतलब है कि गुड़िया देवी उप्र के चित्रकूट जिले के राजापुर थाना के यमुना पार के एक गांव की रहने वाली है। परिजनों ने पहले जहां उसकी शादी की थी, वहां अनबन होने के चलते वह मऊ थाना क्षेत्र पहुंची और डकैत गौरी यादव गैंग के सदस्य हरिश्चंद्र पटेल से दोस्ती होने के बाद उससे शादी कर उसके साथ रहने लगी थी। डकैत हरिश्चंद्र के मारे जाने के बाद उसने साढ़े पांच लाख रुपये के इनामी डकैत बबुली कोल से 2014-15 में शादी रचा ली थी। गुड़िया के बबुली कोल से हुई एक डेढ़-दो साल की मासूम बच्ची भी है।

चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र के वाशिंदे बताते हैं कि रीवां का अविवाहित व्यवसायी सुनील उर्फ अनिल (59) यहां मजदूरों को ब्याज पर रुपये देने का काम करता था। इसी दौरान उससे गुड़िया की मुलाकात हुई और दोनों के बीच प्रेम प्रसंग बढ़ा। इसके बाद दोनों ने इसी माह 18 नवंबर को रीवां के एक शिव मंदिर में शादी रचा ली थी।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कुख्यात साढ़े पांच लाख रुपये के इनामी डकैत बबुली कोल को इसी साल 14 सितंबर को मध्य प्रदेश पुलिस ने मार गिराने का दावा किया था। हालांकि, बाद में उत्तर प्रदेश की चित्रकूट पुलिस की घेराबंदी में गिरफ्तार हुए कई डकैतों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताकर सवाल खड़े कर दिए थे।

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