दैनिक भास्कर हिंदी: गुरू पूर्णिमा पर नासा ने ट्विटर पर शेयर किया चांद का फोटो, पढे़ं क्या लिखा ?

July 27th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. गुरु पूर्णिमा को भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल इसे आषाढ़ पूर्णिमा में मनाया जाता है। हर त्योहारों की तरह गुरु पूर्णिमा को लेकर भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होती है। यह त्योहार रविवार को मनाया जाएगा। इस बार की गुरु पूर्णिमा को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बेहद खास बना दिया है। नासा के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक पोस्ट किया गया है, जिसमें गुरु पूर्णिमा के बारे में जिक्र किया गया है।

नासा ने इस ट्वीट में इसका जिक्र किया है कि पूर्णिमा के दिन चांद वाले को पूरी दुनिया में किन नामों से जाना जाता है, जिसमें गुरु पूर्णिमा का नाम सबसे ऊपर है। इसके अलावा हे मून, राइप कॉर्न मून, थंडर मून नाम भी बताए गए हैं। नासा ने इस पोस्ट के साथ ही चंद्रमा की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर भी जारी की है। इस ट्वीट को 1 हजार बार रिट्वीट किया गया है और भारतीय नासा के इस ट्वीट को काफी पसंद कर रहे हैं।

लोगों ने कहा भारत के लिए सम्मान की बात

लोगों का कहना है कि ये देशवासियों के लिए सम्मान की बात है, आखिरकार हमारी पूर्णिमा को नासा ने भी गुरु मान लिया है। नासा के ट्वीट को बड़ी तादाद में लोगों ने री-ट्वीट और लाइक भी किया।

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिन्दू परम्परा के अनुसार गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति सिर छुकाकर उनके प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। ऐसा माना जाता है कि गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा करने से ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। गुरु पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था। मान्यता है कि उन्होंने चारों वेदों को लिपिबद्ध किया था। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

व्यास पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

  • आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा कहते हैं। इसी दिन महाभारत लिखने वाले कृष्ण द्वैपायन व्यास यानि वेद व्यास का जन्म हुआ था।
  •  माना जाता है कि व्यास ने चारों वेदों को लिखा था। इसीलिए उनका नाम वेद व्यास भी पड़ा। उनके नाम पर गुरुपूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
  • नासा ने जिन 5 और नामों का जिक्र किया है, उन्हें जुलाई महीने में उत्तरी-पूर्वी अमेरिका और इंग्लैंड में खासकर किसानों बोलते हैं।
  • वे इस दिन आने वाली फसल के स्वागत में जश्न मनाते हैं। वे गाना गाकर और नाचकर दिन-रात मस्ती करते हैं।
  • बक मून युवा हिरनों को सींग आने और थंडर मून गर्मी का आनंद लेने के लिए कहते हैं। इसे हे मून भी कहते हैं।