दैनिक भास्कर हिंदी: निर्भया केस: तारीख पर तारीख! ऐसे कानून का फायदा उठाकर मौत को टाल रहे हैं चारों दोषी

January 20th, 2020

हाईलाइट

  • चारों दोषियों को 1 फरवरी को होगी फांसी
  • विनय शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्भया केस के चारों दोषियों को फांसी देने की मांग उठ रही है। वहीं चारों गुनहगार कानून का सहारा लेकर अपनी फांसी की सजा टाल रहे हैं। पहले चारों को 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी। अब नया डेथ वारंट की तारीख 1 फरवरी तय हो गई है। ऐसे में फिर चारों कानून का फायदा उठाकर तारीख को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। वे एक-एक कर अर्जी दे रहे हैं। 

कानूनी विकल्प खत्म
लोगों का कहना है कि अगर चार में से एक गुनहगार के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं, तो पहले उसे फांसी दी जाएं। हालांकि एक जुर्म में सजा पाए सभी दोषियों को एक साथ फांसी देने का नियम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कारण है दोषियों के साथ अन्याय नहीं हो। 

जेलर जांचते है दोषियों की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने 1982 में एक फैसले पर कहा है कि फांसी की सजा  के मामले में पहले जेलर को बाकी दोषियों के मामले की स्थिति को जांचना होगा। अगर बाकी गुनहगारों की फांसी माफ हो चुकी है। यह बात उच्च अथॉरिटी और अदालत को बताना होगा। सुप्रीम कोर्ट के वकील ज्ञानंत सिंह ने बताया कि जेलर फांसी देने से पहले चेक करता है। किसी दोषी की सजा माफ तो नहीं हुई है। सह दोषी की दया याचिका पर आने वाले आदेश का असर दूसरे दोषी के केस पर पड़ता है। जेलर को फांसी देने से पहले अदालत को बताना होता है कि मामले के बाकी गुनहगारों की दया याचिका अभी लंबित है। 

कानून का फायदा उठा रहे
निर्भया दुष्कर्म के चार दोषियों अक्षय, पवन, मुकेश और विनय को फांसी की सजा दी गई है। चारों की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। विनय शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव याचिका खारिज हो चुकी है। दो दोषियों ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल नहीं की है। दोषी मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ठुकरा चुके हैं। जबकि तीन ने दया याचिका दाखिल नहीं की है। 

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