दैनिक भास्कर हिंदी: मॉब लिंचिंग रोकथाम: हर जिले में नियुक्त होगा नोडल ऑफिसर, टास्क फोर्स का भी गठन होगा

July 25th, 2018

हाईलाइट

  • गौरक्षा के नाम पर अलवर में हुई मॉब लिंचिंग के बाद केन्द्र सरकार एक्शन में नजर आ रही है।
  • सरकार ने सभी राज्यों से हर जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी नियुक्त करने को कहा है।
  • सोशल मीडिया की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का भी गठन करने को कहा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गौरक्षा के नाम पर अलवर में हुई मॉब लिंचिंग के बाद केन्द्र सरकार एक्शन में नजर आ रही है। देशभर में एक के बाद एक सामने आ रही ऐसी मॉब लिंचिंग की घटनाओं से निपटने के लिए केन्द्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इन घटनाओं की रोकथाम के लिए मंगलवार को सभी राज्यों से हर जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का भी गठन करने को कहा है।

पुलिस अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है, मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने में असक्षम रहने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 17 जुलाई को मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए सरकार ने यह एडवाइजरी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजी है। मॉब लिंचिंग पर पिछले एक महीने में ये दूसरी एडवाइजरी है। मॉब लिंचिंग की बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार मॉब लिचिंग को बहुत गंभीरता से ले रही है और ‘अगर इन घटनाओं को रोकने के लिए जरूरत पड़ी तो’ कानून लाया जाएगा।

मॉब लिंचिंग रोकथाम के लिए पैनल का गठन
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भीड़ की हिंसा को रोकने के उपायों पर सुझाव देने के लिए सोमवार को एक पैनल बनाया है। केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व वाला यह पैनल चार सप्ताह के अंदर मंत्रियों के समूह को अपनी सिफारिशें देगा। जिसके बाद ये निर्णय लिया जाएगा कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार को किस तरह के कदम उठाने की जरुरत है।

कौन-कौन है समिति में शामिल?
गृह सचिव आर.के गौबा की अध्यक्षता में अधिकारियों की समिति में न्याय विभाग, कानूनी मामलों, विधान और सामाजिक न्याय व सशक्तिकरण के सचिव भी सदस्य होंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री थावररचंद गहलोत भी इसके सदस्य हैं। मंत्रियों का समूह (जीओएम) प्रधानमंत्री को अपनी सिफारिशें देगा।