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ऑन-लाइन दर्ज चोरी के मामलों ने बनाया दिल्ली को क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस इनसाइड स्टोरी)

October 24th, 2019 20:30 IST
 ऑन-लाइन दर्ज चोरी के मामलों ने बनाया दिल्ली को क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस इनसाइड स्टोरी)

हाईलाइट

  • ऑन-लाइन दर्ज चोरी के मामलों ने बनाया दिल्ली को क्राइम-कैपिटल! (आईएएनएस इनसाइड स्टोरी)

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी क्राइम इन इंडिया-2017 रिपोर्ट पर बारीक नजर डालने पर पता चला है कि चोरी और वाहन चोरी के मद में ऑन-लाइन दर्ज हुई एफआईआर ने ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को क्राइम कैपिटल बना डाला है। वर्ष 2017 में दिल्ली में दर्ज कुल आपराधिक मामलों में 75 फीसदी हिस्सा सीधे-सीधे चोरी और वाहन चोरी की ऑनलाइन दर्ज एफआईआर के खाते में है। इसके बाद 25 या 26 फीसदी आंकड़े दिल्ली में घटित बाकी आपराधिक घटनाओं से संबंधित हैं।

यही वह सनसनीखेज तथ्य है, जो क्राइम इन इंडिया-2107 का जिन्न बाहर आने के बाद से दिल्ली पुलिस की आत्मा को कहीं न कहीं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कचोट रहा है। मौजूदा हालातों में ऐसा होना लाजिमी भी है। क्योंकि चोरी और वाहन चोरी के मद में दर्ज ऑन-लाइन एफआईआर ने ही तो दिल्ली को क्राइम-कैपिटल साबित करवा डाला है। भले ही दिल्ली पुलिस इस पर खुल कर कुछ नहीं बोल रही है, मगर दिल्ली पुलिस के अधिकांश आला-अफसरों के दिल में इस विषय पर हूक बार-बार उठ रही है।

यहां सवाल एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़ों के सही-गलत का कतई नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने आंकड़े तो क्राइम इन इंडिया-2017 में हर बार की तरह वही छापे हैं, जो उसे राज्यों से भेजे गए या फिर हासिल हुए हैं। मुद्दा यह है कि एनसीआरबी द्वारा राज्यों से हासिल आंकड़ों की आखिरकार गणना किस फार्मूले की मदद से की गई है?

देश के महानगरों में 2017 में दर्ज आपराधिक आंकड़ों के मुताबिक, सन 2017 में दिल्ली में आईपीसी के तहत कुल 2 लाख 33 हजार 580 आपराधिक मामले या एफआईआर दर्ज हुईं या मामले दर्ज किए गए। इस आंकड़े में चोरी और वाहन चोरी के मामलों की संख्या करीब एक लाख 65 हजार 765 थी। कुल दर्ज एफआईआर में से अगर वाहन चोरी और चोरी के मामलों को घटा दें तो दर्ज बाकी मामलों की संख्या घटकर महज 67 हजार 815 ही रह जाती है। यानी दिल्ली की देश में क्राइम रैंकिंग-रेटिंग बाकी बचे आपराधिक (67 हजार 815 मामले) मामलों पर ही की जानी चाहिए थी। जबकि रैंकिंग-रेटिंग तय हुई है 2 लाख 33 हजार 580 आपराधिक मामलों के आधार पर। बस यही वह ब्लैक-स्पॉट साबित हुआ, जहां दिल्ली के माथे पर क्राइम-कैपिटल लिख गया।

एक बार मान भी लिया जाए कि क्राइम इन इंडिया-2107 में दर्ज आंकड़ों के गुणा-गणित लगाए जाने का फार्मूला सही भी है। फिर सवाल यह पैदा होता है कि क्या दिल्ली पुलिस को उसका अपना ही वह फार्मूला खुद पर भारी साबित हुआ, जो उसने किसी जमाने में जनहित में चोरी और वाहन चोरी की ऑनलाइन फ्री एफआईआर रजिस्ट्रेन के नाम से लागू करवाया था। क्योंकि इसी मद में क्राइम इन इंडिया-2017 में दिल्ली के सर्वाधिक आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं।

हांलांकि, दिल्ली पुलिस के ही एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, यदि देश के सभी 19 महानगरों की भी चोरी और वाहन चोरी की घटनाओं के आंकड़ों को घटाकर तुलना की गई होती तो दिल्ली सीधे-सीधे पहले स्थान से 9वें स्थान पर आ जाती।

आंकड़ों के कथित रूप से बिगड़े गुणा-गणित पर दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के उपायुक्त (डीसीपी) आईपीएस राजन भगत ने आईएनएस से स्वीकार किया, हां, दिल्ली को कथित रूप से पहले पायदान की कैटेगरी में रखवाने में हमारे यहां लागू चोरी और वाहन चोरी की ऑनलाइन एफआईआर भी एक प्रमुख वजह हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा, अगर 2017 में दर्ज कुल आपराधिक मामलों पर नजर डालें तो वाकई उनमें से करीब 75 फीसदी मामले सिर्फ ऑनलाइन चोरी-वाहन चोरी की मद में ही देखने को मिलेंगे।

इस बात को दिल्ली-हिमाचल प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस (1990 के दशक में दिल्ली के पुलिस आयुक्त रहे और बाद में इंटेलीजेंस ब्यूरो के निदेशक पद से रिटायर हो चुके) अरुण भगत ने भी स्वीकार किया। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, हां, चोरी और वाहन चोरी के फ्री ऑनलाइन एफआईआर रजिस्ट्रेशन के आंकड़े दिल्ली को क्राइम-कैपिटल कैटेगरी में खड़ा करने के लिए काफी हैं। ऐसा मगर होना नहीं चाहिए। इसे रेटिंग-रैंकिंग को अंतिम रूप देने से पहले एनसीआरबी को खुद ही देखना चाहिए था।

पूर्व आईपीएस ने आगे कहा, क्राइम इन इंडिया-2017 हालांकि मैंने देखी पढ़ी नहीं है, मगर आपसे (आईएएनएस से) जो सुना उस नजिरए से पहले दिल्ली के ऑनलाइन चोरी और वाहन चोरी के मामलों को घटाकर बाकी बचे संगीन आपराधिक मामलों के आधार पर ही आंकड़ों की रेटिंग और रैंकिंग अगर होती तो इसमें कुछ गलत भी नहीं था। यह तो मेरा निजी विचार है। सब करना-धरना तो एनसीआरबी को है।

उन्होंने कहा, अब चूंकि एनसीआरबी ने आंकड़े जारी कर दिए हैं तो, इस पर मैं ज्यादा कुछ कहना मुनासिब नहीं समझता। वैसे इस मुद्दे पर आपत्ति या सुझाव जो भी है, उसे दिल्ली पुलिस या फिर जो भी प्रभावित राज्य पुलिस हो उसे, एनसीआरबी को एक बार जरूर बताना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।