बच्चों का आधार: पैरेंटस अपने पांच साल से छोटे बच्चों के लिए बनवां सकते हैं ब्लू कलर वाला आधार कार्ड

October 7th, 2021

हाईलाइट

  • भारत में दो प्रकार के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में आधार कार्ड 28 जनवरी 2009 को लॉच हुआ था, इसके बाद से अब तक इसमें कई नए बदलाव आ चुके हैं। आधार देश के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शामिल है और इसका उपयोग कई चीजों के लिए किया जा सकता है। सालों से यह UIDAI द्वारा यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर वाले आधार कार्ड भारतीयों के पहचान के लिए इसे मुहईया कराए जाते हैं। बिना आधार आप बैंक में खाता नहीं खुलवा सकते हैं और ना ही सरकार द्वारा दी गई अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

क्या होता है बाल आधार?
भारत में दो प्रकार के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है, एक वयस्क लोगों के लिए और दूसरा बच्चों के लिए। बच्चों के लिए बनने वाले आधार को 'बाल आधार' के नाम से जाना जाता है, नवजात शिशु के पैदा होते ही माता-पिता उसके लिए बाल आधार का आवेदन दे सकते हैं। यह आधार 5 साल से छोटे बच्चों को दिया जाता है क्योंकि कि उस समय उनकी बायोमैट्रिक नहीं ली जा सकती है।

कैसे बनवाएं बाल आधार?
बाल आधार के लिए भी आवेदन करने की प्रक्रिया वयस्कों से मिलती-जुलती होती है। माता-पिता को आधार के लिए नामांकन केंद्र पर उपलब्ध आवेदन पत्र को अपने पहचान प्रमाण पत्र, पते का प्रमाण, रिश्ते का प्रमाण जैसे सहायक दस्तावेजों के साथ भरना होगा इसके साथ ही जन्म तिथि (डीओबी) दस्तावेज की भी जरुरत होती है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को नीले रंग का आधार कार्ड दिया जाएगा है। बच्चे के 5 साल से ऊपर होते ही यह आधार अमान्य हो जाएगा। हालांकि, बच्चे के 5 साल का होते ही तो उसके आधार डेटा को अपडेट करना होता है और 15 साल में फिर से एक बार करना होता है। सरकार द्वारा बच्चों के इस अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट को मुफ्त रखा गया है।


 

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