comScore

संसदीय समिति अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय जल संधियों पर करेगी बैठक

November 15th, 2020 15:31 IST
 संसदीय समिति अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय जल संधियों पर करेगी बैठक

हाईलाइट

  • संसदीय समिति अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय जल संधियों पर करेगी बैठक

नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। एक संसदीय समिति अगले सप्ताह चीन समेत पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय जल संधि की समीक्षा करेगी। जून में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण है।

समिति साथ ही पाकिस्तान, नेपाल और भूटान के साथ इसी तरह की संधि से जुड़े जल संसाधन प्रबंधन और भारत में बाढ़ प्रबंधन पर भी चर्चा करेगी।

जल संसाधन संबंधी संसदीय स्थायी समिति मंगलवार को अपनी बैठक आयोजित करने के लिए तैयार है, जिसमें जल शक्ति मंत्रालय (जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग) और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों द्वारा मौखिक साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस पहल से अवगत संसद सूत्र ने आईएएनएस से कहा कि समिति दो मंत्रियों के मौखिक प्रस्तुतियों के आधार पर मुद्दों को उठाएगी और अगर कुछ बदलाव की जरूरत होगी तो इसके लिए सलाह देगी।

समिति के सचिवालय द्वारा जारी एक संसदीय नोट के अनुसार, देश में बाढ़ प्रबंधन के विषय पर दो मंत्रालयों द्वारा मौखिक साक्ष्य के संबंध में मामला, विशेष संदर्भ में जल संसाधन प्रबंधन / बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय जल संधियों सहित बैठक में नेपाल, चीन, पाकिस्तान और भूटान के साथ संधि / समझौते पर चर्चा की जाएगी।

यह बैठक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से संसद परिसर में आयोजित की जाएगी।

इस वर्ष 13 सितंबर को गठित, 31 सदस्यीय समिति भारत-चीन के बीच संघर्ष के मद्देनजर अपनी गठन के बाद पहली बार मामले को उठाएगी।

इस समिति में कुल 21 लोकसभा सदस्य और 10 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं, जो इस बाबत चर्चा करेंगे और संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद भारत सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।

बिहार के पश्चिमी चंपारण सांसद संजय जयसवाल इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

2017 डोकलाम संकट के बाद, चीन ने मानसून के आंकड़ों को भारत से साझा नहीं किया था, जोकि पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। चीन ने ऐसा करके एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) की शर्तों का उल्लंघन किया है। बाद में 2019 में, पुलवामा हमलों के बाद, पाकिस्तान जाने वाले पानी को मोड़ने के लिए भारत की योजना को गति दी गई है।

आईएएनएस

आरएचए/एसकेपी

कमेंट करें
iYl1n
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।