comScore

पाकिस्तान तालिबान पनाहगाहों को बंद करे, तभी अफगानिस्तान में शांति संभव

June 12th, 2020 17:01 IST
 पाकिस्तान तालिबान पनाहगाहों को बंद करे, तभी अफगानिस्तान में शांति संभव

हाईलाइट

  • पाकिस्तान तालिबान पनाहगाहों को बंद करे, तभी अफगानिस्तान में शांति संभव

नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 12 जून (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के प्रभावशाली थिंक टैंक में से एक ने कहा है जब तक पाकिस्तान तालिबान के लिए अपने पनाहगाहों को बंद नहीं कर देता है, तब तक अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते के टिकाऊ होने की संभावना कम रहेगी।

ऑस्ट्रेलिया के लोवी संस्थान ने एक नए लेख में कहा है कि बीते अफगान राजनीतिक समझौतों 1989 रावलपिंडी शूरा, 1992 पेशावर समझौते और 1993 में इस्लामाबाद समझौते ने दिखाया है कि अफगान मुजाहिदीन तंजीमों (सैन्य-राजनीतिक संगठन) एक समझौते तक पहुंच तो जाते हैं, लेकिन फिर भी समझौते के लिए प्रतिबद्ध नहीं रह पाते क्योंकि वे संघर्ष के वास्तविक स्रोत, जैसे कि बाहरी सैन्य और वित्तीय सहायता या बाहरी पनाहगाहों की समस्या की अनदेखी करते हैं।

इस पेपर को एशिया-पैसिफिक कॉलेज ऑफ डिप्लोमेसी के शोधार्थी फर्खोनदेह अकबरी और इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के पूर्व नीति विश्लेषक डॉ. तिमोर शरण द्वारा लिखा गया है।

दोनों विद्वानों ने कई अकादमिक और नीतिगत अध्ययनों पर अपने तर्क को आधारित किया है जो बताते हैं कि पनाहगाहों को उपलब्ध कराने जैसे बाहरी समर्थन बगावत के परिणामों पर निर्णायक प्रभाव डालते हैं। लेख में कहा गया है, बाहरी रूप से समर्थित विद्रोह लंबे समय तक चलते हैं और इसमें शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भी हिंसा जारी रहती है।

पेपर लिखने वाले दोनों लोगों ने कहा है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दिलचस्पी, अफगानिस्तान में रणनीतिक पहुंच हासिल करने और भारत द्वारा रणनीतिक घेराव से बचने के दो व्यापक उद्देश्यों से प्रेरित है।

पहले लक्ष्य को हासिल करने के लिए पाकिस्तान ने काबुल में अपेक्षाकृत मित्रतापूर्ण और पाकिस्तान समर्थक सरकार सुनिश्चित करने के प्रयास में तालिबान और बड़ी पश्तून आबादी का उपयोग किया है।

पेपर में कहा गया है, दूसरे लक्ष्य को साधने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान में और मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और वाणिज्यिक उपस्थिति के डर से भारत का प्रभाव इस क्षेत्र में कम करने के लिए अनवरत संघर्ष में लगा हुआ है।

इसमें लिखा गया है, जब तक पाकिस्तान, तालिबान के लिए पनाहगाहों को बंद करने के लिए ठोस रूप से प्रतिबद्ध नहीं हो जाता, तब तक यह संगठन युद्ध में बने रहने के विकल्प को बनाए रखेगा।

कमेंट करें
Y6rf7
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।