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पेशावर हाईकोर्ट ने सैन्य अदालत के फैसले को बदला

June 18th, 2020 19:01 IST
 पेशावर हाईकोर्ट ने सैन्य अदालत के फैसले को बदला

हाईलाइट

  • पेशावर हाईकोर्ट ने सैन्य अदालत के फैसले को बदला

इस्लामाबाद, 18 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान में कानूनी न्याय प्रणाली द्वारा सैन्य अदालतों में मुकदमों के निष्पक्ष परीक्षण और सजाओं के फैसलों पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया जाता रहा है।

सैन्य अदालतों द्वारा आतंकवादियों को सुनाई गई मौत की सजाओं के बीच यह बहस दब जाती है लेकिन सिविल अदालतों में निष्पक्ष सुनवाई का मामला हमेशा सामने आता रहता है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव को दी गई मौत की सजा को रोकने के भारत के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद यह बहस और भी तेज हो गई। सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी और आतंकवाद के मामले में मौत की सजा सुनाई थी।

ताजा मामले में, पेशावर उच्च न्यायालय (पीएचसी) ने सैन्य अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए कम से कम 200 लोगों की सजा को रद्द करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा करने का आदेश दिया है।

पीएचसी द्वारा रिहा किए गए 200 लोगों में ऐसे भी लोग हैं जिन्हें मौत की सजा सैन्य अदालत ने सुनाई थी। उम्र कैद और 10 साल तक जेल की सजा काट रहे लोग भी इनमें शामिल हैं।

पीएचसी की दो सदस्यीय पीठ ने संक्षिप्त आदेश जारी करते हुए कहा कि अभियुक्तों का मुकदमा निष्पक्ष तरीके से नहीं चलाया गया और इनके स्वीकारोक्ति बयानों के आधार पर इन्हें सजा सुना दी गई।

इस आदेश के अलावा, पीएचसी ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण कम से कम 100 और व्यक्तियों की ऐसी ही याचिकाओं को भी स्थगित कर दिया।

अदालत के इन आदेशों का बेहद महत्व इसलिए भी है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने 13 मई को पीएचसी को सैन्य अदालत से दोषी करार दिए गए कम से कम 290 दोषियों की रिहाई या जमानत पर किसी अंतरिम आदेश को पारित करने से रोक दिया था। लेकिन पीएचसी ने संघीय सरकार की याचिका पर सुनवाई की और आतंकवाद के आरोपी 290 लोगों के पक्ष में आदेश दिया।

16 दिसंबर 2014 को पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए वहशियाना आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में सैन्य अदालतें स्थापित की गई थीं। इस हमले में आतंकवादियों ने कम से कम 144 स्कूली बच्चों और शिक्षकों की हत्या कर दी थी।

इसके बाद, कई आतंकवादियों को सैन्य अदालतों द्वारा मृत्युदंड दिया गया।

लेकिन, वैश्विक निकायों द्वारा सैन्य अदालतों की वैधता पर हमेशा सवाल उठाया गया और इसकी आलोचना की गई।

200 दोषी ठहराए गए लोगों को रिहा करने के पीएचसी के ताजा फैसले से सैन्य अदालतों द्वारा दिए जाने वाले मृत्युदंड और आरोपियों की निष्पक्ष सुनवाई तक पहुंच पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।