दैनिक भास्कर हिंदी: मन की बात: अयोध्या फैसले पर जनता ने बताया देशहित से बढ़कर कुछ नहीं- PM मोदी

November 24th, 2019

हाईलाइट

  • 'मन की बात' में पीएम मोदी ने की प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की अपील
  • भाषा-बोली की रक्षा के लिए दी धारचूला की संस्कृति का मिसाल
  • NCC की भांति देशभक्ति व अनुशासन को बनाएं चरित्र का हिस्सा : पीएम मोदी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देश की जनता को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बताया कि 'राम मंदिर पर जब फैसला आया तो पूरे देश ने उसे दिल खोलकर गले लगाया और पूरी सहजता और शांति के साथ  उसे स्वीकार किया।' उन्होंने कहा कि 'देश में, शांति, एकता और सदभावना के मूल्य सर्वोपरि हैं और जब सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर फैसला दिया तो 130 करोड़ भारतीयों ने फिर ये साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ नहीं है।' बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर मालिकाना हक रामलला को दिया है। वहीं मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए किसी दूसरे स्थान पर जमीन दी जाएगी।

 

 

नवंबर का चौथा रविवार NCC दिवस

बता दें कि आज राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) दिवस है। पीएम मोदी ने बताया कि हर साल नवम्बर महीने का चौथा रविवार NCC दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 'आमतौर पर हमारी युवा पीढ़ी को फ्रेंडशिप डे बराबर याद रहता है, लेकिन बहुत लोग ऐसे भी हैं जिन्हें NCC डे भी उतना ही याद रहता है।'

पीएम मोदी ने कहा कि 'देश की जनता को भी NCC की भांति देशभक्ति, अनुशासन, कठिन परिश्रम, लीडरशिप और स्वार्थहीन सेवा को अपने चरित्र का हिस्सा बना लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि 'मेरा भी सौभाग्य रहा है कि मैं भी बचपन में मेरे गाँव के स्कूल में NCC कैडेट रहा हूं, तो मैं इसका अनुशासन, इसकी गणवेश जानता हूं और इसी कारण विश्वास का स्तर भी बढ़ता है। मुझे इन सभी चीजों को बचपन में एक NCC कैडेट के रूप में अनुभव करने का मौका मिला था।'

प्लास्टिक मुक्त बनें भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को प्लास्टिक मुक्त करने की बात कही। पीएम मोदी ने बताया कि 'जीवन में कभी-कभी छोटी-छोटी चीजें भी हमें बहुत बड़ा सन्देश दे जाती हैं। यदि हम भी सिर्फ सिर्फ अपने आस-पास के इलाके को प्लास्टिक के कचरे से मुक्त करने का संकल्प कर लें तो फिर ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ पूरी दुनिया के लिए एक नई मिसाल पेश कर सकता है।' बता दें कि इससे पहले भी अक्टूबर में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम मोदी से औपचारिक मुलाकात करने के लिए भारत दौरे पर थे, उस दौरान पीएम मोदी ने महाबलीपुरम में समुद्र किनारे से प्लास्टिक कचरा फेंक कर प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश दिया था।

फिट इंडिया में शामिल होने की अपील

पीएम मोदी ने अपने कार्यक्रम में कहा कि भारत में 'फिट इंडिया अभियान' से तो आप परिचित ही होंगे। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 'फिट इंडिया वीक' की एक सराहनीय पहल की है, जिसमें विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षक और माता-पिता भी भाग ले सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी स्कूलों से फिट इंडिया रैंकिंग में शामिल होने की अपील की।

बता दें कि केंद्र सरकार ने 29 अगस्त को फिट इंडिया अभियान की शुरूआत की थी, जिसका उद्देश्य नए भारत के प्रत्येक नागरिक को फिट बनाना और स्वस्थ रखना है। 29 अगस्त को 'राष्ट्रीय खेल दिवस' हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के दिन मनाया जाता है। इस दिन पंजाब और चंडीगढ़ के लोग बहुत धूमधाम से मेजर ध्यानचंद की जयंती मनाते हैं।

'कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी'

मन की बात में पीएम मोदी ने भारतीय संस्कृति की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 'हमारी सभ्यता, संस्कृति और भाषाएं पूरे विश्व को विविधता में एकता का सन्देश देती हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि '130 करोड़ भारतीयों का ये वही देश है, जहां कहा जाता था कि "कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी।" हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएं, सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं। हालांकि हमें इस बात की भी चिंता रहती है कि कहीं हमारी भाषाएं और बोलियां खत्म ना हो जाए।'

धारचूला की संस्कृति का जिक्र

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने साल 2019 को 'इंटरनेश्नल ईयर ऑफ इंडिजिनियस लेंगुएजेस' घोषित किया है। इसके तहत उन भाषाओं पर जोर दिया जा रहा है, जो विलुप्त होने के कगार पर है। इसी बीच पीएम मोदी ने भाषा-बोली को बचाने के लिए उत्तराखंड के धारचूला गांव की संस्कृति का उदाहरण दिया। पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों धारचूला का इतिहास पढ़ा, जिससे उन्हें काफी संतोष मिला। उन्होंने धारचूला की संस्कृति के बारे में बताया कि 'पिथौरागढ़ के धारचूला में रंग समुदाय के काफी लोग रहते हैं, जिनकी बोल-चाल की भाषा रगलो है।' उन्होंने बताया कि 'रंग समुदाय के लोग इस बात को सोचकर दुखी थे कि इनकी भाषा बोलने वाले लोग लगातार कम होते जा रहे हैं और अपनी भाषा को बचाने का संकल्प लेने के बाद इन्होंने अपने समुदाय के बहुत से लोग जुटा लिए।'

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