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रेफरेंडम 2020 के लिए प्रतिबंधित एसएफजे की निगाहें अब जम्मू-कश्मीर पर (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

July 23rd, 2020 20:30 IST
 रेफरेंडम 2020 के लिए प्रतिबंधित एसएफजे की निगाहें अब जम्मू-कश्मीर पर (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

हाईलाइट

  • रेफरेंडम 2020 के लिए प्रतिबंधित एसएफजे की निगाहें अब जम्मू-कश्मीर पर (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

रजनीश सिंह

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। प्रतिबंधित सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) समूह के बारे में पता चला है कि वह जम्मू-कश्मीर में अपनी पैठ बनाने में लगा है। खुफिया रिपोर्टों से खुलासा हुआ है कि संगठन ने हाल ही में घाटी में रह रहे सिखों से इसके ऑनलाइन जनमत संग्रह 2020 को समर्थन देने के लिए कहा है, जो भारत से पंजाब को अलग करने के बारे में है।

पंजाब और दिल्ली में जनमत संग्रह 2020 वोटर पंजीकरण के लिए समर्थन प्राप्त करने की असफल कोशिशों के बाद, एसएफजे का अगला निशाना जम्मू-कश्मीर है, जहां वह 26 जुलाई को अवैध अभियान के लिए मतदाता पंजीकरण शुरू करने की योजना बना रहा है।

भारत भर के सिख समुदाय ने जनमत संग्रह 2020 के इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) प्रायोजित प्रचार को खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई एसएफजे द्वारा शुरू किए गए दुर्भावनापूर्ण अभियान का समर्थन कर रही है क्योंकि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने तथाकथित जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के पक्ष में ट्वीट करना शुरू कर दिया है।

कश्मीर में सिखों को स्वतंत्रता सेनानी और सिख सैनिकों के रूप में बताते हुए अमेरिका स्थित खालिस्तानी कट्टरपंथी संगठन ने अपने सबसे खतरनाक एजेंडे जनमत संग्रह 2020 का समर्थन करने का आग्रह किया है।

खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि अलगाववादी समूह ने घाटी में कश्मीरियों को जम्मू-कश्मीर में 26 जुलाई को मतदाता पंजीकरण का समर्थन करने के लिए आह्वान किया है।

इसकी कोशिश जम्मू-कश्मीर में रहने वाली अनुमानित तीन लाख सिख आबादी का समर्थन प्राप्त करने की है।

एसएफजे के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया था कि इस समूह ने जम्मू -कश्मीर में पंजाब की स्वतंत्रता जनमत संग्रह के लिए श्रीनगर में गुरुद्वारा चाती पातशाही और जम्मू में गुरुद्वारा सिंबल कैंप में अरदास समारोह के साथ 26 जुलाई को मतदाता पंजीकरण शुरू करने की योजना बनाई है।

पन्नू उन नौ खालिस्तान समर्थकों में से हैं जिन्हें इस महीने की शुरुआत में भारत सरकार ने आतंकवादी के रूप में घोषित किया था। अमेरिका में रहने वाला आतंकवादी पन्नू रेफरेंडम 2020 अभियान में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

समूह का दावा है कि स्वतंत्र खालिस्तान कश्मीर की आजादी का मार्ग प्रशस्त करेगा।

एसएफजे ने 4 और 19 जुलाई को क्रमश: पंजाब और दिल्ली में रूसी और कनाडाई पोर्टलों के माध्यम से इसी तरह का मतदाता पंजीकरण शुरू किया था, ताकि पंजाब में सिखों के लिए एक अलग मातृभूमि खालिस्तान की मांग करने के लिए भारत-विरोधी एजेंडे का प्रचार किया जा सके।

गृह मंत्रालय ने पिछले साल जुलाई में रेफरेंडम 2020 को बढ़ावा देने के लिए एसएफजे पर प्रतिबंध लगा दिया था।

एसएफजे को पाकिस्तान स्थित संचालकों द्वारा हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पंजाब में कट्टरपंथी सिख तत्वों को धन आदि सहायता प्रदान की जाती है।

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