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मोदी सरकार पार्ट-2 में पहली बार होगी DAC की बैठक, 10 हजार करोड़ की डिफेंस डील पर होगा फैसला

मोदी सरकार पार्ट-2 में पहली बार होगी DAC की बैठक, 10 हजार करोड़ की डिफेंस डील पर होगा फैसला

हाईलाइट

  • डील में हेलिकॉप्टर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल
  • कुछ समय पहले विसंगति के कारण रद्द कर दी थी डील

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में क्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लगभग 10,000 करोड़ रुपए की हथियार प्रणालियों के अधिग्रहण का फैसला किया है, जिसमें हेलिकॉप्टर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पहली रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक दक्षिण ब्लॉक में अगस्त के पहले सप्ताह में होने वाली है। यह पहली बार है कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में लौटने के बाद डीएसी की बैठक होगी।

सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया, "वर्तमान में, रक्षा मंत्री भारतीय तट रक्षक के लिए 14 मध्यम-लिफ्ट हेलिकॉप्टरों के अधिग्रहण से संबंधित एक मामले पर फैसला करने वाले हैं, जिसकी लागत 7,000 करोड़ रुपए से अधिक है। इन हेलीकाप्टरों की आपूर्ति के लिए यूरोप, अमेरिका और रूस के कई विक्रेताओं को निविदा जारी करने की योजना है।

कुछ विसंगतियों के कारण रक्षा मंत्रालय ने कुछ समय पहले इसे रद्द कर दिया था। एक यूरोपीय विक्रेता को पिछली प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाले के रूप में चुना गया था। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल तीन सेवाओं और इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए नई नीतियों और पूंजी अधिग्रहण पर निर्णय लेने के लिए रक्षा मंत्रालय में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। डीएसी ने 2,000 करोड़ रुपए तक की परियोजनाओं के लिए अंतिम मंजूरी भी दी है। 

डीएसी बैठक के दौरान, रक्षा मंत्री भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनाती के लिए दो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली की प्रस्तावित खरीद पर भी विचार करेंगे, हालांकि नई सरकार के गठन के बाद पहली बार डीएसी की बैठक हो रही है, लेकिन मोदी प्रशासन पहले ही लगभग 8500 करोड़ रुपए सुरक्षाबलों की आपातकालीन आवश्यकता को पूरा करने के लिए खर्च कर चुका है।

बता दें कि हथियार प्रणाली जैसे स्पाइस 2000 बम धमाके और इजरायल से स्पाइक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल, स्ट्रम अटका एयर एटीजीएम और रूस से कई अन्य स्पेयर पार्ट्स को भारतीय वायु सेना द्वारा इन शक्तियों के तहत अधिग्रहित किया गया है।

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