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गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से विदाई, PM मोदी भावुक होकर बोले- ये परिवार की तरह चिंता करते हैं

February 09th, 2021 23:01 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल पूरा हो गया है। 28 साल की लंबी सियासी पारी खेलने के बाद उन्हें आज सदन से विदाई दी जाएगी। पांच बार राज्यसभा सांसद और दो बार लोकसभा सदस्य रहे चुके गुलाम नबी आजाद की विदाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण देते वक्त भावुक हो गए। उन्होंने गुलाम नबी आजाद से अपनी दोस्ती का जिक्र किया। कश्मीर में हुई एक आतंकी घटना का जिक्र करते हुए मोदी कई बार रुके, रोए और आंसू पोंछे, फिर थरथराते शब्दों में कहा- आजाद उस वक्त इस तरह से फिक्रमंद थे, जैसे कोई अपने परिवार के लिए होता है।

पीएम मोदी ने कश्मीर की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, गुलाम नबी जी जब मुख्यमंत्री थे। मैं भी एक राज्य के मुख्यमंत्री के नाते काम करता था। हमारी उस समय तक अच्छी निकटता थी। शायद ही कोई घटना होगी जब हम दोनों के बीच में संपर्क सेतु नहीं रहा हो। एक बार गुजरात के यात्री कश्मीर गए थे। वहां आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया। शायद 8 लोग मारे गए थे। इस घटना के बाद सबसे पहले गुलाम नबी जी का मुझे फोन आया है और वो फोन सिर्फ सूचना देने का नहीं था। उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। उस समय प्रणब मुखर्जी साहब रक्षामंत्री थे। मैंने उनको फोन किया और कहा, मुझे मृत शव को लाने के लिए फोर्स के हवाई जहाज की मदद चाहिए।

देर रात हो चुकी थी। प्रणब जी ने कहा आप चिंता मत कीजिए मैं व्यवस्था करता हूं। रात में फिर गुलाम नबी जी का फोन आया। वे एयरपोर्ट थे। उन्होंने मुझे फोन किया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता करे वैसी चिंता वो कर रहे थे। भावुक होते हुए पीएम मोदी ने कहा, पद, सत्ता जीवन में आती रहती है, लेकिन उसे कैसे पचाना है गुलाम नबी जी से सीखें। ये मेरे लिए बड़ा भावुक पल था। दूसरे दिन सुबह फोन आया। मोदी जी सब लोग पहुंच गए। इसलिए एक मित्र के रूप में गुलाम नबी जी को घटनाओं और अनुभवों के आधार पर मैं आदार करता हूं। मुझे पूरा विश्वास है। उनकी सौम्यता, नम्रता इस देश के लिए कुछ करने की उनकी कामना उन्हें चैन से बैठने नहीं देगी। मैं फिर एक बार उनकी सेवाओं के लिए आदरपूर्वक धन्यवाद करता हूं। उन्होंने गुलाम नबी जी को संबोधित करते हुए कहा, मन से मत मानो की आप इस सदन में नहीं है। आपके लिए मेरे द्वार हमेशा खुले हैं। आपके सुझावों का स्वागत करता हूं। आपको मेरी शुभकमनाएं।

इस भावुक भाषण से पहले पीएम मोदी ने कहा, गुलाम नबी जी का एक शौक शायद बहुत कम लोगों को पता होगा। कभी उनके साथ बैठोगे तो बताएंगे। हम सरकारी बंगालों में रहते हैं। बंगाले की दीवारे, सोफा सेट के आस-पास ही हमारा दिमाग रहता है। लेकिन गुलाम नबी जी ने उस बंगले में जो बगीचा बनाया है। वो कश्मीर की घाटी की याद दिला दे ऐसा बागीचा बनाया है। सरकारी जगह को भी प्यार से संवारा है।

गुलाम नबी आजाद को लेकर पीएम मोदी ने कहा, मुझे चिंता इस बात की है। गुलाम नबी जी के बाद इस पद को जो संभालेंगे उनको गुलाम नबी जी से मैच करने में बहुत दिक्कत आएगी। गुलाम नबी अपने दल की चिंता करते थे, लेकिन देश की और सदन की भी उतनी ही चिंता करते थे। ये छोटी बात नहीं है। एक बहुत बड़ी बात है। वरना ने विपक्ष के नेता के रूप में अपना दबदबा पैदा करना का मोह किसी को भी हो सकता है। मैं शरद पवार जी को भी इसी कैटेगरी में रखता हूं। वे सदन और देश को प्राथमिकता देने वाले नेताओं में से थे।

पीएम मोदी ने कहा, गुलाम नबी जी ने बखूबी इस काम को निभाया है। मुझे याद है इस कोरोनाकाल में मैं एक कोर लीडर की बैठक कर रहा था। उसी दिन गुलाम नबी जी का फोन आया है। उन्होंने कहा, मोदी जी आप सभी पार्टी लीडर की मीटिंग बुलाइए। मुझे अच्छा लगा उन्होंने मुझे सभी दलों के अध्यक्षों के साथ बैठक करने का सुझाव दिया। मैंने उस मीटिंग को किया भी। इस प्रकार का संपर्क और उसका मूल कारण हैं। उन्हें दोनों पक्ष का अनुभव रहा। सत्ता दल का भी और विपक्ष का भी। 28 साल का कार्यकाल अपने आप में बड़ी बात होती है।

पीएम मोदी ने कहा, बहुत साल पहले की बात है। शायद उस समय अटल जी सरकार रही होगी। उस समय मैं सदन में किसी काम से आया था। मैं तब राजनीति में नहीं था। संगठन के लिए काम करता था। मैं यहां बाहर गुलाम नबी जी के साथ गप्पे मार रहे थे। जैसे पत्रकारों का स्वभाव होता है। बराबर नजर लगाए बैठे थे कि इन दोनों का मेल कैसे हो सकता है। हम दोनों हंसी-खुशी से बात कर रहे थे। जैसे ही वहां से निकले तो पत्रकारों ने घेरा लिया। उस वक्त गुलाम नबी जी ने बहुत बढ़िया जवाब दिया था। वो जवाब हम लोगों के लिए बहुत काम आने वाला है। उन्होंने कहा, आप हम लोगों को अखबारों में टीवी, या पब्लिक मीटिंगों में लड़ते-झगड़ते देखते हैं। लेकिन सचमुच में इस छत के नीचे हम जैसे परिवार को एक वातावरण कहीं नहीं होता।

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