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जस्टिस रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ लगी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

September 26th, 2018 15:25 IST
जस्टिस रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ लगी याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की नियुक्ति में दखल का यह सही मंच नहीं है
  • आधार मामले में जस्टिस सीकरी ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की तरफ से फैसला पढ़ा
  • सुको ने बुधवार को SC/ST को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण पर भी फैसला सुनाया है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आधार कार्ड और प्रमोशन में आरक्षण पर फैसला देने के बाद अगले CJI रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ दाखिल याचिका को SC ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की नियुक्ति में दखल का यह सही मंच नहीं है। 

कई कामों में अब आधार कार्ड जरूरी नहीं
इसके अलावा आधार मामले में जस्टिस सीकरी ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की तरफ से फैसला पढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि यह समाज के हाशिए वाले वर्गों को शक्ति प्रदान करता है। हालांकि, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि स्कूलों में एडमिशन और मोबाइल फोन कनेक्शन के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं है। यूजीसी, एनईईटी और सीबीएसई परीक्षाओं के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि सुनिश्चित किया जाए कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड प्रदान न किया जाए। जस्टिस एके सीकरी ने कहा, ये जरूरी नहीं है कि हर चीज बेहतर हो, कुछ अलग भी होना चाहिए। जज ने कहा, आधार कार्ड गरीबों की ताकत का जरिया बना है। इसमें डुप्लीकेसी की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, आधार कार्ड पर हमला करना लोगों के अधिकारों पर हमला करने के बराबर है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि मनी बिल के रूप में योग्य नहीं होने पर आधार एक्ट को मनी बिल के रूप में पास करना संविधान के साथ धोखाधड़ी है, यह मूल संरचना का उल्लंघन करता है।

नौकिरयों में प्रमोशन की गेंद राज्यों के पाले में
सुको ने बुधवार को SC/ST को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण पर भी फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि ये जरूरी नहीं है। सुको ने कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में SC/ST आरक्षण के लिए कोई डेटा जमा करने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने नागराज मामले में फैसले को सही बताया, उस फैसले पर फिर से विचार की जरूरत को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने इस मामले को 7 जजों की बेंच के पास भेजे जाने से भी इनकार किया है। बता दें कि 30 अगस्त को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।