दैनिक भास्कर हिंदी: निर्भया कांड के 6 साल: अब भी गुनहगारों का इंतजार कर रहा फांसी का फंदा

December 16th, 2018

हाईलाइट

  • निर्भया कांड के 6 साल पूरे
  • 6 साल बाद भी गुनहगारों को फांसी नहीं
  • ये मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है-सुप्रीम कोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय समाज को झंकझोर देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड को रविवार को छह साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अब भी ये सवाल जिंदा है कि निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर कब लटकाया जाएगा? निर्भया के पिता ने कहा कि रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद अभी तक क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल नहीं किया गया है और न ही दया याचिका दाखिल की गई है। इसके बावजूद अबतक निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सका है। निर्भया की मां आशा देवी कहती हैं कि निर्भया के अपराधी आज भी जिंदा हैं और यह कानून व्यवस्थआ की हार है। निर्भया की मां ने साथ ही कहा है कि हम सभी लड़कियों से यह कहना चाहते हैं कि वे खुद को कमजोर न समझें।

रिव्यू पिटिशन खारिज
कानून के विशेषयज्ञों के अनुसार अभी क्यूरेटिव पिटिशन और मर्सी पिटिशन दाखिल करने का कानूनी विकल्प बाकी है। इस मामले में पहले ही चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है और तीन मुजरिमों की रिव्यू पिटिशन खारिज हो चुकी है। वहीं चौथे अपराधी अक्षय की ओर से रिव्यू पिटिशन दाखिल नहीं की गई। मुजरिमों के वकील ने बताया कि उनकी ओर से क्यूरिटिव पिटिशन दाखिल किया जाना है। जबकि एक मुजरिम ने खुद को जुवेनाइल घोषित करने की अर्जी दाखिल की है। यह मामला अब तक कानूनी दावपेंच में उलझा हुआ है। वहीं निर्भया के माता-पिता का कहना है कि इस वजह से वह अभी तक अंधेरे में हैं कि आखिर इंसाफ कब मिलेगा। 

रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस
सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों को पिछले साल 5 मई को फांसी की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद तीन अपराधियों ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 को चारों मुजरिमों पवन, अक्षय, विनय और मुकेश की फांसी की सजा को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने मरने से पहले जो बयान दिया, वह बेहद अहम और पुख्ता साक्ष्य हैं। जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि ये मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि अत्यंत बर्बरता की गई और दरिंदगी की सारी हदें पार की गईं। गैंग रेप के बाद चलती बस से उसे नीचे फेंक दिया गया। उसके दोस्त को भी नीचे फेंका गया। जाड़े की रात में उनके शरीर पर कपड़े तक नहीं थे। उन्हें मरने के लिए नीचे फेंका गया। साथ ही उनके शरीर पर बस चढाने की कोशिश की गई, ताकि कोई सबूत न बचे। हवस का शिकार बनाया गया और उसे मनोरंजन का साधन समझा गया।