भारत के बड़े शहरों में रहने वालों की जिंदगी से घट रहे हैं साढ़े सात साल, जानिए वायु प्रदूषण पर हुई स्टडी के चौंकाने वाले खुलासे

भारत के बड़े शहरों में रहने वालों की जिंदगी से घट रहे हैं साढ़े सात साल, जानिए वायु प्रदूषण पर हुई स्टडी के चौंकाने वाले खुलासे
वायु प्रदूषण संकट भारत के बड़े शहरों में रहने वालों की जिंदगी से घट रहे हैं साढ़े सात साल, जानिए वायु प्रदूषण पर हुई स्टडी के चौंकाने वाले खुलासे
हाईलाइट
  • बांग्लादेश के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के कारण इंसान के सामने नई चुनौती खड़ी हो जा रही है। एक स्टडी के मुताबिक, अगर वायु प्रदूषण की गुणवत्ता ऐसे ही बनी रहती है तो आने वाले समय में उत्तर भारत में रह रहे करीब 51 करोड़ लोग अपने जीवन के 7.5 साल गंवा सकते है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में मानव स्वास्थ्य के लिए प्रदूषण सबसे ज्यादा खतरा बन चुका है।

जिसकी वजह से लोगों को न सिर्फ तमाम बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उनकी उम्र पर भी कम होने का संकट गहराने लगा है। डीएनए हिंदी के मुताबिक, शिकागो विश्वविद्यालय में एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक में कहा गया है कि वर्ष 2013 से दुनिया के प्रदूषण में बढ़ोत्तरी में भारत का लगभग 44 फीसदी योगदान है। 

रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 1998 के बाद भारत में औसत वार्षिक कण प्रदूषण में 61.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक के नए विश्वेलषण के मुताबिक, वायु प्रदूषण भारत में औसत जीवन प्रत्याशा को 5 साल तक कम कर देता है।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित देश है। इसमें कहा गया कि दिल्ली में औसत सालाना पीएम 2.5 का स्तर 107 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक होता है। जो WHO के तय स्तर से 21 गुना अधिक है। इसके कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में वायु प्रदूषण लोगों से उनके जीवन के करीब 10 साल छीन ले रहा है।

दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत में करीब 1.3 अरब ऐसे लोग रहते हैं, जहां पर प्रदूषण अधिक है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय स्तर भी ज्यादा है। देश की 63 फीसदी आबादी उन इलाकों में रहती है, जहां वायु प्रदूषण भारत के खुद के वायु गुणवत्ता मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए कण प्रदूषण सबसे गंभीर समस्या है। जिसने जीवन प्रत्याशा को पांच साल कम कर दिया है, इसके विपरीत बच्चे और मातृ कुपोषण औसत जीवन प्रत्याशा को लगभग 1.8 वर्ष कम कर देता है, जबकि धूम्रपान औसत जीवन प्रत्याशा को 1.5 वर्ष कम करता है। दुनियाभर में वायु प्रदूषण को लेकर काफी चिंता है। हालांकि दुनियाभर के कई देश कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दे रहे हैं लेकिन जमीन पर अभी दिख नहीं रहा है।

सबसे ज्यादा ये राज्य होंगे प्रभावित

बताया जा रहा है कि डब्ल्यूएचओ के पीएम 2.5 स्तर के मानक को पूरा किया गया तो जीवन प्रत्याशा यूपी में 8.2 साल, बिहार में 7.9 साल, पं. बंगाल में 5.9 साल और राजस्थान में 4.8 साल बढ़ जाएगी। साल 2019 में सरकार की तरफ से प्रदूषण के खिलाफ युद्ध की घोषणा की गई थी और वर्ष 2024 तक कण प्रदूषण स्तर को 20 से 30 फीसदी तक कम करने के लक्ष्य के साथ अपना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया। 

Created On :   15 Jun 2022 7:22 PM GMT

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